Tuesday, 30 June 2026
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दुर्गा वाहिनी मातृशक्ति के प्रांतीय वर्ग में 2 सौ से ज्यादा युवतियों ने लिया शौर्य प्रशिक्षण 

9 दिवसीय प्रशिक्षण हासिल करने के आखिरी दिन शहर में दंड, तलवारबाजी, घुड़सवारी करते और भगवा फहराते किया शौर्य का प्रदर्शन

अखिलेश बंसल, बरनाला

विश्व हिंदू परिषद द्वारा भारतीय हर नारी को झांसी की रानी बनाने, अबला बनी रही नारी को सबला बनाने तथा सेवा-सुरक्षा-संस्कार एवं धर्मो रक्षति रक्षितः के उद्देश्य से देशभर में शौर्य प्रशिक्षण चल रहे हैं। जिसके अंतर्गत गत दिनों पंजाब के जिला बरनाला में भी 9 दिवसीय दुर्गा वाहिनी मातृशक्ति के प्रांतीय वर्ग का आयोजन हुआ। जिसमें 200 युवतियों व महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने आत्मरक्षा के लिए तलवारबाजी, मंगाल, लाठी/दंड चलाना, आग के गोले के बीच से सुरक्षित निकलना और हाथों से पत्थरों को तोड़ने का प्रशिक्षण लिया, जिसका प्रदर्शन उन्होंने शहरभर में किया। जिसे देख हर कोई दंग रह गया।

बरनाला का इतिहास बन गया शौर्य प्रदर्शनः

गौरतलब हो कि शौर्य प्रशिक्षित बहन-बेटियां जैसे ही शहर के मुख्य बाजारों फरवाही बाजार, सदर बाजार, हंडियाया बाजार और के.सी. रोड पर दाखिल हुईं। उनमें कुछ मोटरसाईकिलों पर सवार थी, कुछ घोड़ों पर सवार थीं, हाथों में तलवार, दंड और भगवा ध्वज पकड़े तथा आक्रामक और सशक्त रूप में पहुंची यह महिलाएं झांसी की रानी और मां दुर्गा की साक्षात मिसाल दिखाई दे रही थी। जिनका रास्ते में जगह जगह हर धर्म, हर समाज, हर परिवार के अलावा विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ मंदिर कमेटियों और गुरुद्वारा कमेटियों द्वारा फूल वर्षा से, छबीलें और लंगर आयोजित कर भव्य अभिनंदन किया गया।

शौर्य प्रदर्शन ने बदली लोगों की सोचः

जो परिवार अपनी बेटियों को भारतीय सेना में भी भेजने को संकोच करते रहे हैं, बरनाला में आयोजित हुए दुर्गा वाहिनी शौर्य प्रदर्शन में भाग ले रही बहन-बेटियों के प्रदर्शन को देख पूरी तरह सोच ही बदल गई। हर किसी की जुबान पर था कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में तो ‘सिविल डिफेंस’ (नागरिक सुरक्षा) एवं ‘सेल्फ-डिफेंस’ (आत्मरक्षा) के तौर पर एक पीरियड अनिवार्य होना ही चाहिए।

यह चिंगारी तेज होगी क्या…..

उल्लेखनीय है कि पंजाब की धरती हमेशा से योद्धाओं की भूमि रही है। देश के लाल किला से भी बेटियों के सशक्तिकरण करने का ऐलान हो चुका है। देश के पिछले इतिहास पर फोकस करें तो भारतवर्ष की सबसे ज्यादा महिलाएं अंग्रेजों और मुगलों के अत्याचारों का शिकार रही हैं। यदि झांसी की रानी लक्ष्मी बाई जैसी बेटी ने सिर पर कफन बांध कर सामना किया और देश की अन्य महिलाओं का भी सशक्तिकरण किया तो आज उनका नाम सम्मान व अदब से लिया जाता है।

विभिन्न कलाओं से किया प्रशिक्षितः

नगर स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री आर्य महिला कॉलेज के हाल में 9 दिन आयोजित हुए दुर्गा वाहिनी शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का नेतृत्व विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री नीलमणि समाधिया, राष्ट्रीय संयोजिका प्रज्ञा महाला और क्षेत्रीय संयोजिका वंदना चौहान, मातृशक्ति की संयोजिका रेशमा और दुर्गा वाहिनी की विभाग संयोजिका तमन्ना, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य श्रीनिवास, विहिप के जिला अध्यक्ष यशपाल शर्मा ने किया। जिन्होंने ‘अबला’ को ‘सबला’ में बदलना सिखाया। उन्हें कानूनी अधिकारों, साइबर सुरक्षा के साथ बौद्धिक एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण भी दिया गया। शौर्य प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में भी शामिल थी।