Wednesday, 15 July 2026
Breaking News
CBI FILES 16TH CHARGESHEET AGAINST BUILDER COMPANY, ITS DIRECTORS AND PUBLIC SERVANTS IN THE HOMEBUYERS FRAUD CASES CBI ARRESTS PROCLAIMED OFFENDER IN WEST BENGAL SUKANTA GHOSH MURDER CASE CBI COURT SENTENCES FOUR ACCUSED TO TWO YEARS IMPRISONMENT IN BANK FRAUD CASES JUVENILE AMONG THREE HELD WITH HAND GRENADE, 3 SOPHISTICATED RIFLES IN AMRITSAR  GOTHIA CUP: MINERVA ACADEMY FC ROUTS LILLESTRØM SK 3 BY 13-1 TO CONTINUE WINNING STREAK LIQUOR BARON DODA’S DAUGHTER-IN-LAW SUHANI JOINS AAP 30KG HEROIN RECOVERED IN AMRITSAR; TWO OPERATIVES HELD  KARGIL VIJAY DIWAS 2026: RAKSHA MANTRI FLAGS-OFF MOTORCYCLE EXPEDITION FROM NATIONAL WAR MEMORIAL TO KARGIL WAR MEMORIAL GURDWARA CHIEF SEWADAR BOOKED FOR FB POST INVITING COMMUNITY ON ‘SATLUJ’ SCREENING VIGILANCE BUREAU NABS ASI RED HANDED ACCEPTING BRIBE OF RS. 7 THOUSANDS
Punjab Trending

नेक्टर केमिकल फैक्ट्री की भूमिगत पाइपलाइन टूटी, लापरवाही आई सामने, नगरपरिषद के पास रिकॉर्ड तक नहीं

पिंकी सैनी/ डेराबस्सी

औद्योगिक क्षेत्र में एक बार फिर केमिकल फैक्ट्री की लापरवाही सामने आई है। नेक्टर केमिकल फैक्ट्री की भूमिगत पाइपलाइन टूटने से केमिकलयुक्त पानी सड़क पर बहने लगा। जब नगर कौंसिल की टीम मौके पर पहुंची तो जांच में बड़ा खुलासा हुआ। यह पाइपलाइन 15 साल पहले सी-फॉर्म लाइसेंस के तहत डाली गई थी, लेकिन नगर कौंसिल डेराबस्सी के पास इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।

नगर कौंसिल के कार्यकारी अधिकारी रणबीर सिंह ने साफ कहा कि फैक्ट्री को ऐसी कोई भी परमिशन नहीं दी गई थी। 25 जून को फैक्ट्री प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया जाएगा।

ऐसे खुला मामला : 22जून की शाम नेक्टर फैक्ट्री के पास सर्विस रोड पर अचानक तीखी गंध के साथ गहरे रंग का पानी बहने लगा। स्थानीय दुकानदारों को लगा कि सीवर लाइन टूट गई है। शिकायत के बाद नगर कौंसिल के सेनेटरी इंस्पेक्टर और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची।

खुदाई कराने पर पता चला कि जमीन के 8 फीट नीचे से एक स्टील की पाइपलाइन गुजरी है। यह पाइपलाइन सीधे नेक्टर फैक्ट्री केमिकल स्टोरेज टैंक से जुड़ी हुई है। पाइपलाइन का एक जॉइंट टूटने से उसमें से केमिकलयुक्त पानी लीक हो रहा था। पानी का रंग हल्का पीला था और उससे आंखों में जलन हो रही थी।

15 साल पुरानी अवैध पाइपलाइन :   फैक्ट्री प्रबंधन ने शुरू में बताया कि यह पाइपलाइन 2010 में सी-फॉर्म लाइसेंस के तहत इंडस्ट्रियल वेस्ट डिस्पोजल के लिए डाली गई थी। सी-फॉर्म लाइसेंस पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा फैक्ट्रियों को रसायन रखने और डिस्पोजल के लिए दिया जाता है। लेकिन नगर कौंसिल डेराबस्सी के रिकॉर्ड रूम में 2010 से 2024 तक का पूरा रिकॉर्ड खंगालने के बाद भी इस पाइपलाइन का कोई नक्शा, परमिशन लेटर या एनओसी नहीं मिला।

ईओ रणबीर सिंह ने कहा, “अगर 15 साल पहले भी पाइपलाइन डाली गई थी तो नगर कौंसिल से एनओसी लेना अनिवार्य था। जमीन हमारी है, सड़क हमारी है। बिना परमिशन के जमीन के नीचे पाइपलाइन डालना पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट 1911 का उल्लंघन है।”

मौखिक अनुमति का कोई कानूनी आधार नहीं होता। अब जब मामला लीक का है तो नगर कौंसिल लिखित दस्तावेज मांग रही है। फैक्ट्री प्रबंधन ने 48 घंटे का समय मांगा है ताकि वे 15 साल पुराने कागज पेश कर सकें।

पर्यावरण और लोगों की सेहत पर खतरा :  सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 साल से इस पाइपलाइन से किस तरह का केमिकल वेस्ट बहाया जा रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के दिनों में इसी पाइपलाइन से केमिकल सीधे घग्गर दरिया में बहा दिया जाता था।

डेराबस्सी सिविल अस्पताल के डॉ.  कहते हैं, “पिछले 6 महीने में स्किन एलर्जी, सांस और पेट की बीमारी के केस 30 फीसदी बढ़े हैं। औद्योगिक क्षेत्र के आसपास के लोगों में यह शिकायतें ज्यादा हैं। अगर यह केमिकल ग्राउंड वाटर में मिला तो कैंसर तक का खतरा बढ़ सकता है।”

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि नेक्टर फैक्ट्री को ईटीपी यानी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाना अनिवार्य है। ईटीपी से ट्रीट होने के बाद ही पानी डिस्पोज किया जा सकता है। सीधे भूमिगत पाइपलाइन से डिस्पोजल पूरी तरह अवैध है।

नगर कौंसिल की लापरवाही भी सामने आई :   15 साल से जमीन के नीचे पाइपलाइन बिछी रही और नगर कौंसिल को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह नगर कौंसिल के इंजीनियरिंग विंग की बड़ी लापरवाही है।  ईओ रणबीर सिंह ने माना कि “रिकॉर्ड मैनेजमेंट में कमी है। 2010 का रिकॉर्ड डिजिटल नहीं है। फिजिकल फाइलें ढूंढने में समय लग रहा है। अब पूरे औद्योगिक क्षेत्र की भूमिगत पाइपलाइनों का सर्वे कराया जाएगा। पंजाब वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन एक्ट 1974 की धारा 25 के अनुसार, बिना बोर्ड की सहमति के किसी भी नाले, नदी या जमीन में औद्योगिक वेस्ट नहीं बहाया जा सकता। इसके उल्लंघन पर 6 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
साथ ही पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट 1911 की धारा 198 के अनुसार, नगर कौंसिल की सीमा में जमीन के नीचे कोई भी पाइप, केबल या नाला डालने के लिए लिखित अनुमति जरूरी है। अनुमति न लेने पर पाइपलाइन तोड़कर 25,000 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।

अब क्या होगी कार्रवाई : ईओ रणबीर सिंह ने बताया कि कल फैक्ट्री को तीन बिंदुओं पर नोटिस दिया जाएगा:
1. बिना अनुमति जमीन के नीचे पाइपलाइन डालने पर पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट के तहत कार्रवाई।
2. केमिकल लीक होने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर एनजीटी के नियमों के तहत जुर्माना।3. तुरंत पाइपलाइन को सील कर ईटीपी से ही वेस्ट डिस्पोजल करने का आदेश। साथ ही पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी ताकि वह सी-फॉर्म लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई करे।

पिछला इतिहास भी रहा है विवादित :   2022 में भी नेक्टर फैक्ट्री पर रात के समय केमिकलयुक्त पानी घग्गर में बहाने का आरोप लगा था। तब पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 लाख रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया था। उस समय भी फैक्ट्री ने कहा था कि ईटीपी में तकनीकी खराबी आ गई थी।

कहते हैं विशेषज्ञ क्या :  पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. बलविंदर सिंह कहते हैं, “डेराबस्सी में 80 फीसदी फैक्ट्रियां ईटीपी को रात 10 बजे के बाद बंद कर देती हैं और वेस्ट सीधे ड्रेन में बहा देती हैं। क्योंकि ईटीपी चलाने में बिजली का खर्च 2-3 लाख रुपये महीना आता है। नगर कौंसिल और प्रदूषण बोर्ड की नाइट पेट्रोलिंग न होने से फैक्ट्रियों का हौसला बढ़ा है।”

लोगों की मांग
 1. नेक्टर फैक्ट्री को तुरंत सील किया जाए जब तक पाइपलाइन पूरी तरह बंद न हो जाए।
2. पूरे औद्योगिक क्षेत्र की भूमिगत पाइपलाइनों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए।
3. लीक हुए केमिकल से प्रभावित लोगों का मुफ्त मेडिकल चेकअप कराया जाए।
4. नगर कौंसिल के जिम्मेदार इंजीनियर पर भी कार्रवाई हो जिन्होंने 15 साल तक इस पर ध्यान नहीं दिया।

प्रशासन की अगली तैयारी

एसडीएम डेराबस्सी ने कहा कि नगर कौंसिल की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रदूषण नियंत्रण समिति की मीटिंग बुलाई जाएगी। अगर फैक्ट्री प्रबंधन संतोषजनक जवाब नहीं देता तो फैक्ट्री का बिजली-पानी कनेक्शन काटने की सिफारिश की जाएगी।

डेराबस्सी के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ नेक्टर फैक्ट्री का मामला नहीं है। पूरे औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी दर्जनों अवैध पाइपलाइनें हैं। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में डेराबस्सी का पानी पीने लायक नहीं बचेगा।