Saturday, 24 October 2026
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कौन कहता है गया वक्त लौट कर नहीं आता?

 

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

वही इमारत, वही वातावरण, वही छात्र, वही अध्यापक, वही सीटियों, युवाओं का शोर और वही कॉलेज, जहां से लगभग 52 साल पहले हम लोग अपनी स्नातक की डिग्री ले कर निकले थे। जिंदगी की आपाधापी से दूर कल मुझे और मेरे कॉलेज के कुछ सहपाठियों को डिग्री कॉलेज सोलन के 68 वें स्थापना दिवस में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कॉलेज की युवा प्रिंसिपल शिवानी शर्मा मुख्यतिथि थीं। वहां शिक्षकों, छात्रों, के खिले चेहरों में हम सभी अपना 52 साल पुराना चेहरा ढूंढ रहे थे।

दिलों में वही उमंग वही ऊर्जा महसूस हो रही थी जो कभी 18-20 साल की उम्र में होती थी। मेरे साथ ओएसए के अध्यक्ष राजीव चोपड़ा, मेरे सीनियर भाई कुलराकेश पंत, मेरे सहपाठी मोहिंदर नाथ सोफ़त, हरि शर्मा, लीला दत्त शर्मा, पंकज, विजय वर्मा, रीता, सुलोचना, रेणुका भी वहां मौजूद थीं। कुछ घंटों में हमने अपने कॉलेज की दिनों को फिर से जी लिया। कुछ समय के लिए हम यह भूल गए कि अब हम उम्र के 70 पड़ाव पार कर चुके हैं।

वहां पूरी तरह से बिंदास हो कर हम ने जो चाहा वो कहा वो किया। गाने के लिए मेरी अपनी आवाज़ इतनी खराब है कि पूछो मत। पर जोश में हमने भी गीत की कुछ पंक्तियां गा दी। हालांकि बाद में जब मैने वह रिकॉर्डिंग सुनी तो मेरी अपनी हंसी ही नहीं रुक रही थी। सोच रहा था इतना बेसुरा कोई कैसे गा सकता है। पर स्टूडेंट्स ने उसे भी स्वीकार किया। लेकिन कॉलेज के छात्र छात्राओं ने जो भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए उसे देख कर कम से कम मै तो इंडियन आइडल जैसे प्रोग्राम भूल गया। प्रतिभा का खज़ाना नज़र आया। चाहे वो एकल नृत्य था या फ़िर नाटी। कमाल के थे। क्लासिकल डांस, और राग आधारित गीत भी सम्मोहित करने वाले थे।

हमें हमारा छात्र जीवन फिर से लौटाने के लिए हम कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ शिवानी शर्मा, ओएसए की सचिव डॉ स्नेहा मेहता, और कॉलेज के पूरे स्टाफ और छात्रों के आभारी हैं। अब सोचता हूं कि कौन कहता है कि गया वक्त लौट कर नहीं आता? बस ज़रा अपने स्कूल या कॉलेज जा कर देखिए। मुझे पूरा विश्वास है कि कभी फिर से हमें यह मौका ज़रूर मिलेगा।

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