(MOREPIC1)अमृतसर, फेस2न्यूज:
अमृतसर में जो भी अधिकारी नए नियुक्त होकर आते हैं या कोई नेताजी पधारते हैं तो एक ही बात रस्म निभाने के लिए कहते हैं कि गुरु नगरी में आकर बहुत प्रसन्नता हुई, शांति मिली। अधिकारी तो यही कहते हैं कि सौभाग्य से गुरु नगरी की सेवा का मौका मिला। सच्चाई यह है कि यह सारी सेवा गुरु नगरी की नहीं, वीआईपी क्षेत्र की, नई बनी कालोनियों की, अधिकारियों के घरों वाली सड़कों की हो रही है। जो सचमुच गुरु नगरी है, जिसके लिए यह कहा जाता है कि गुरु रामदास जी ने बसाई और शहर की सुरक्षा के लिए बारह दरवाजे महाराजा रंजीत सिंह ने बनवाए, उन बारह दरवाओं के अंदर कोई योजना नहीं पहुंचती, कोई अधिकारी भी नहीं। एक या दो चुनावों द्वारा चुने गए नेताओं को छोड़कर शेष सभी चार दीवारी से दूर बंगलों में हैं। किसी भी अधिकारी की कोठियां भी शहर के अंदर नहीं। सफाई व्यवस्था भी गुरु नगरी में नहीं। टूटी सड़कें, कूड़े के ढेर, मच्छर, मक्खियां और दिन रात कुत्तों की चीख पुकार तथा कुत्तों के काटने से तड़पते लोग यही गुरु नगरी में है।
पंजाब में पूर्व केबिनेट मंत्री रही श्रीमती लक्ष्मीकांता चावला का सभी सरकारी अधिकारियों से यह सवाल है कि जिस दिन अमृतसर में सेवा के लिए आएं, उस दिन जिस गुरु नगरी का नाम लेकर शहर की सेवा संभाल रहे थे उस गुरु नगरी की भी सुध लीजिए। वीआईपी क्षेत्रों और कोठियों बंगलों के इलाकों की समस्याएं आप समझते हैं, शहर की नहीं। स्मार्ट सिटी के नाम पर भी अमृतसर शहर से बहुत बड़ा धोखा कया जा रहा है, जिसे सुनने व देखने के लिए अमृतसर प्रशासन से लेकर केंद्र तक कोई तैयार नहीं।
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गुरु नगरी का नाम लेने वाले जानते भी हैं गुरु नगरी कहां है?
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