Saturday, 16 May 2026
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आपके एएमएच, एएफसी और उम्र फर्टिलिटी ट्रीटमेंट प्लानिंग में क्या भूमिका निभाते हैं

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चंडीगढ़  : आईवीएफ साइकल की प्लानिंग करते समय तीन बातें सबसे महत्त्वपूर्ण होती हैं – महिला की उम्र, उसके एएमएच (एएमएच) लेवल्स और एन्ट्रल फॉलिकल काउंट (एएफसी)। डॉ. राखी गोयल, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, चंडीगढ़ बताती हैं कि इन तीनों से डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि महिला के ओवरी रिजर्व उस वक्त कितनी है। यही जानकारी ट्रीटमेंट की दिशा तय करती है।

एएमएच छोटे ओवरियन फॉलिकल्स से बनता है। इसका लेवल एक आसान ब्लड टेस्ट से पता लगाया जा सकता है। अगर एएमएच का लेवल कम हो, तो इसका मतलब है कि कम ओवरियन रिजर्व है और ओवरी स्टिमुलेशन में रिस्पॉन्स कुछ कम आ सकता है। एएफसी यानी एन्ट्रल फॉलिकल काउंट अल्ट्रासाउंड से जांचा जाता है। इसमें डॉक्टर 2 से 10 मिलीमीटर साइज के फॉलिकल्स गिनते हैं। अगर इनका काउंट कम है, तो इसका मतलब है कि अंडाणु की कमी है।

ट्रीटमेंट प्लानिंग में ये इसलिए जरूरी हैं क्योंकि उम्र के साथ ओवेरियन रिजर्व यानी अंडो की संख्या खुद-ब-खुद घटती जाती है, खासकर 35 साल के बाद। अगर किसी महिला की उम्र अधिक है और उसके एएमएच व एएफसी कम हैं, तो ओवरी स्टिमुलेशन का असर कम देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में दवा की मात्रा बढ़ाई जा सकती है, दूसरे स्टिमुलेशन प्रोटोकॉल अपनाए जा सकते हैं और कुछ अतिरिक्त थेरेपी दी जा सकती है जिससे बेहतर रिस्पॉन्स मिले। ऐसे मामलों में दमपत्तियों को सही सफलता दर के बारे में भी सलाह दी जाती है।

इसकी विपरीत स्थिति का भी ध्यान रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। हाई एएमएच और एएफसी वाली महिलाओं में, जैसा कि अक्सर पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) में देखा जाता है, स्टीमुलेशन के प्रति ओवर- रिस्पांस का जोखिम होता है। ऐसे में डॉक्टर दवा की मात्रा कम रखते हैं और सावधानी बरतते हैं ताकि ओवरी हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सके।

उम्र, एएमएच और एएफसी का एक साथ आंकलन करके, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट एक पर्सनलाइज्ड आईवीएफ तकनीक बना सकते हैं – एक ऐसी रणनीति जो प्रभावी स्टीमुलेशन को सुरक्षा के साथ बैलेंस करती है, साथ ही दम्पतियों को यह स्पष्ट समझ देती है कि उन्हें क्या उम्मीद करनी चाहिए। यह एक खास तौर पर तैयार की गई एप्रोच है जो एक सामान्य योजना और किसी व्यक्ति की बायोलॉजी के लिए खास तौर पर तैयार किए गए प्लान के बीच अंतर पैदा कर सकता है।