Thursday, 30 July 2026
Breaking News
मुख्यमंत्री ने ‘जाखू मन्दिर-संजीवनी बूटी का रहस्य’ पुस्तक का किया विमोचन गुरु पूर्णिमा पर किन्नर समाज ने साईं बाबा को सोने का छत्र किया अर्पित हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम गुरु रविदास नॉर्थ ज़ोन गर्ल्स वॉलीबॉल ट्रॉफी का करेंगे अनावरण पंजाब को इंग्लैंड, फिनलैंड, न्यूजीलैंड आइसलैंड बनाने की जगह आप सरकार ने बना दिया धरना-लैंड, नशा-लैंड, गैंगस्टर-लैंडः ढिल्लों  गुरु रविदास ट्रॉफी: पहला नॉर्थ जोन गर्ल्स वॉलीबॉल कैश प्राइज टूर्नामेंट 18 अगस्त से पंचकूला में संगरूर में भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला गौ हत्या बंद कराने और गौ माता को राष्ट्र माता घोषित कराने एडीसी को दिया ज्ञापन नागा पहाड़ियों में विकास परियोजनाएं और अवैध खनन: असम की बाढ़ त्रासदी का कारण ! सप्त शक्ति कमांड में मनाया गया कारगिल विजय क्या अब धर्मपुर में भी किसी की जान जाने का इंतज़ार है?
काम की बातें Trending

आपके एएमएच, एएफसी और उम्र फर्टिलिटी ट्रीटमेंट प्लानिंग में क्या भूमिका निभाते हैं

Read in:Hindi

चंडीगढ़  : आईवीएफ साइकल की प्लानिंग करते समय तीन बातें सबसे महत्त्वपूर्ण होती हैं – महिला की उम्र, उसके एएमएच (एएमएच) लेवल्स और एन्ट्रल फॉलिकल काउंट (एएफसी)। डॉ. राखी गोयल, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, चंडीगढ़ बताती हैं कि इन तीनों से डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि महिला के ओवरी रिजर्व उस वक्त कितनी है। यही जानकारी ट्रीटमेंट की दिशा तय करती है।

एएमएच छोटे ओवरियन फॉलिकल्स से बनता है। इसका लेवल एक आसान ब्लड टेस्ट से पता लगाया जा सकता है। अगर एएमएच का लेवल कम हो, तो इसका मतलब है कि कम ओवरियन रिजर्व है और ओवरी स्टिमुलेशन में रिस्पॉन्स कुछ कम आ सकता है। एएफसी यानी एन्ट्रल फॉलिकल काउंट अल्ट्रासाउंड से जांचा जाता है। इसमें डॉक्टर 2 से 10 मिलीमीटर साइज के फॉलिकल्स गिनते हैं। अगर इनका काउंट कम है, तो इसका मतलब है कि अंडाणु की कमी है।

ट्रीटमेंट प्लानिंग में ये इसलिए जरूरी हैं क्योंकि उम्र के साथ ओवेरियन रिजर्व यानी अंडो की संख्या खुद-ब-खुद घटती जाती है, खासकर 35 साल के बाद। अगर किसी महिला की उम्र अधिक है और उसके एएमएच व एएफसी कम हैं, तो ओवरी स्टिमुलेशन का असर कम देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में दवा की मात्रा बढ़ाई जा सकती है, दूसरे स्टिमुलेशन प्रोटोकॉल अपनाए जा सकते हैं और कुछ अतिरिक्त थेरेपी दी जा सकती है जिससे बेहतर रिस्पॉन्स मिले। ऐसे मामलों में दमपत्तियों को सही सफलता दर के बारे में भी सलाह दी जाती है।

इसकी विपरीत स्थिति का भी ध्यान रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। हाई एएमएच और एएफसी वाली महिलाओं में, जैसा कि अक्सर पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) में देखा जाता है, स्टीमुलेशन के प्रति ओवर- रिस्पांस का जोखिम होता है। ऐसे में डॉक्टर दवा की मात्रा कम रखते हैं और सावधानी बरतते हैं ताकि ओवरी हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सके।

उम्र, एएमएच और एएफसी का एक साथ आंकलन करके, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट एक पर्सनलाइज्ड आईवीएफ तकनीक बना सकते हैं – एक ऐसी रणनीति जो प्रभावी स्टीमुलेशन को सुरक्षा के साथ बैलेंस करती है, साथ ही दम्पतियों को यह स्पष्ट समझ देती है कि उन्हें क्या उम्मीद करनी चाहिए। यह एक खास तौर पर तैयार की गई एप्रोच है जो एक सामान्य योजना और किसी व्यक्ति की बायोलॉजी के लिए खास तौर पर तैयार किए गए प्लान के बीच अंतर पैदा कर सकता है।