Saturday, 12 September 2026
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सनातन संस्कृति को अपनाकर ही समृद्ध और खुशहाल बन सकता है किसान

अबोहर। माउंट आबू के ज्ञान सरोवर में ब्रह्माकुमारीज के कृषि एवं ग्राम विकास विंग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में ब्र.कु. राजू भाई (उपाध्यक्ष) ने कहा कि “जीवन का मूल आधार चिंतन है और चिंतन धारा को परिवर्तित करने का आधार आध्यात्मिकता है।”

मुख्य वक्ता विशाल भाई ने कहा कि सनातन संस्कृति को अपनाकर ही किसान समृद्ध और खुशहाल बन सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पहले का किसान आत्मनिर्भर था, लेकिन आज दूसरों पर आश्रित है। उन्होंने धरती माँ को “जहर” (रसायनों) से बचाने और आध्यात्मिकता अपनाने पर जोर दिया।

सुरेखा नाडागौडर (कुलपति) ने कहा कि “देश की आत्मा गाँव है और गाँव का आधार किसान है।” उन्होंने किसानों के बहुमुखी विकास पर जोर देने की आवश्यकता बताई।

हितेश भाई पटेल (अध्यक्ष, गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड) ने आयोजन की सराहना की और कहा कि आध्यात्म से जुड़कर किसान अपनी 50% समस्याओं को सहज ही समाप्त कर सकते हैं।

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरला दीदी जी (अध्यक्ष, मेहसाना): उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता से ही गाँव आत्मनिर्भर बनेंगे। किसान हमारे देश की वह हस्ती है जिससे पूरी दुनिया हँसती है।

ब्र.कु. सुदेश दीदी ने जीवन में पाँच बीज बोने की प्रेरणा दी: ज्ञान, शांति, प्रेम, पवित्रता और आनंद। उन्होंने कहा कि स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा को याद करना ही असली कृपा है। मृत्युंजय भाई जी (एडिशनल सेक्रेटरी जनरल) ने कहा कि “जहाँ प्रेम है वहाँ खुशी है, और जहाँ खुशी है वहाँ क्रोध हो ही नहीं सकता।”

ब्र.कु. सुमंत भाई (मुख्य मुख्यालय संयोजक, माउंट आबू) द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्र.कु. तृप्ति दीदी (राष्ट्रीय संयोजिका, सूरत) द्वारा किया गया