चण्डीगढ़ : माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मोहित सूद एंड अदर्स बनाम चंडीगढ़ एंड अदर्स शीर्षक वाली रिट याचिका में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान करते हुए चंडीगढ़ की ग्रेन मार्केट, सेक्टर-26 में पेड पार्किंग के संचालन एवं प्रबंधन के लिए मार्केट कमेटी, चंडीगढ़ द्वारा जारी नए ई-टेंडर को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी है। यह याचिका ग्रेन मार्केट क्षेत्र के निवासियों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों द्वारा अधिवक्ता अरपणदीप नरूला के माध्यम से दायर की गई है।
दिनांक 08.09.2026 के आदेश में माननीय हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक टेंडर की कार्यवाही को अंतिम रूप न दिया जाए।
इस याचिका को मंडी क्षेत्र के 17 निवासियों/व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों ने दायर किया है। याचिकाकर्ताओं ने अन्य प्रावधानों के साथ-साथ 23.08.2026 को जारी नए ई-टेंडर की Clause 12 को चुनौती दी है। अधिवक्ता नरूला ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को वर्तमान टेंडर में चिन्हित 10 निर्धारित पार्किंग स्थलों पर सुव्यवस्थित पार्किंग से कोई आपत्ति नहीं है। उनकी आपत्ति उस प्रावधान को लेकर है, जिसके तहत पूरे मंडी क्षेत्र के प्रवेश द्वारों पर पार्किंग स्लिप जारी करने की अनुमति दी गई है, जबकि टेंडर में केवल 10 निर्धारित पार्किंग स्थलों का उल्लेख किया गया है।पहले भी पेड पार्किंग व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता श्री नरूला ने माननीय न्यायालय के समक्ष ग्रेन मार्केट, सेक्टर-26 में पेड पार्किंग व्यवस्था से जुड़े एक पूर्व मामले का भी उल्लेख किया।
14.08.2020 के पूर्व ई-टेंडर में पेड पार्किंग के संचालन एवं प्रबंधन के लिए विशिष्ट पार्किंग स्थलों की पहचान की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन ठेकेदार ने बाद में मंडी के प्रवेश द्वारों पर पार्किंग स्लिप जारी कर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया था, भले ही कोई वाहन वास्तव में निर्धारित पार्किंग स्थल पर पार्क किया गया हो या नहीं।इस मुद्दे को लेकर पहले सीडब्ल्यूपी नं. 1884 ऑफ 2022, अमित कुमार बंसल एंड अदर्स बनाम चंडीगढ़ प्रशासन दायर हुई थी। माननीय हाई कोर्ट ने मंडी का निरीक्षण करने और पार्किंग व्यवस्था के संचालन के तरीके की जांच करने के लिए लोकल कमिश्नर नियुक्त किए थे। लोकल कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में अन्य बातों के साथ यह दर्ज किया था कि प्रवेश द्वारों पर पार्किंग टिकट जारी किए जा रहे थे, यहां तक कि उन परिस्थितियों में भी जब वाहन वास्तव में निर्धारित पार्किंग क्षेत्रों में पार्क नहीं किए गए थे।
पूर्व की कार्यवाही के परिणामस्वरूप एफआईआर नं 42 दिनांक 17.03.2022 दर्ज हुई, तत्कालीन ठेकेदार का अनुबंध समाप्त किया गया, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा लगभग ₹22.12 लाख की बैंक गारंटी जब्त की गई। इसके बाद माननीय हाई कोर्ट ने 17.10.2023 को उक्त रिट याचिका का निपटारा कर दिया था।
पुराने तंत्र को दोहराए जाने की आशंकायाचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत किया गया कि 23.08.2026 के नए टेंडर में 10 विशिष्ट पार्किंग स्थान/साइट चिन्हित की गई हैं, लेकिन क्लॉज 12 में यह प्रावधान किया गया है कि सेक्टर-26 मंडी के प्रवेश द्वारों पर पार्किंग स्लिप जारी की जाएगी और पार्किंग शुल्क वाहन के बाहर निकलते समय लिया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से ऐसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिसमें किसी वाहन के मंडी में प्रवेश करते ही उसे पार्किंग लेन-देन का हिस्सा माना जाए, भले ही उस वाहन ने 10 निर्धारित पार्किंग स्थलों में से किसी का भी उपयोग न किया हो।निवासी पार्किंग खत्म करने के नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित पार्किंग के पक्ष में
याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी आपत्ति पार्किंग सुविधा या उचित तरीके से संचालित पेड पार्किंग के विरुद्ध नहीं है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्किंग ठेकेदार का अधिकार केवल उन्हीं निर्धारित पार्किंग स्थलों तक सीमित रहे, जिनके संचालन का ठेका दिया गया है।
उनका कहना है कि मंडी में रहने वाले लोग, व्यवसायी, लोडिंग/अनलोडिंग करने वाले वाहन, डिलीवरी वाहन, दुकानों पर आने वाले ग्राहक अथवा मंडी से होकर गुजरने वाले लोग केवल प्रवेश द्वार पार करने के कारण पार्किंग लेन-देन के अधीन नहीं होने चाहिए।याचिकाकर्ताओं ने यह भी इंगित किया है कि टेंडर में निर्धारित पार्किंग स्थलों पर साइनबोर्ड, पार्किंग लाइन की मार्किंग तथा सीसीटीवी कैमरों जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। उनका आग्रह है कि इन व्यवस्थाओं का उपयोग निर्धारित पार्किंग स्थलों को सुव्यवस्थित करने के लिए किया जाए, न कि इन्हें पूरे मंडी क्षेत्र में सामान्य आवागमन और प्रवेश को नियंत्रित करने के माध्यम के रूप में परिवर्तित किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का मूल आग्रह है कि ग्रेन मार्केट में पार्किंग व्यवस्था सुव्यवस्थित और पारदर्शी हो, लेकिन मंडी में प्रवेश करने मात्र को पार्किंग शुल्क लगाने का आधार न बनाया जाए।
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