चंडीगढ, संजय कुमार मिश्रा:
पीएम-राहत योजना भारत सरकार की एक राष्ट्रीय कैशलेस आपातकालीन उपचार योजना है जिसमें सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के तुरंत बाद का महत्वपूर्ण समय) में बिना किसी अग्रिम भुगतान के तुरंत कैशलेस इलाज किया जाता है। यह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना है। इसे फरवरी 2026 में लॉन्च किया गया था।
मुख्य विशेषताएं:
• उद्देश्य: सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के तुरंत बाद का महत्वपूर्ण समय) में बिना किसी अग्रिम भुगतान के तुरंत कैशलेस इलाज देना।
• वित्तीय कवरेज: दुर्घटना की तारीख से 7 दिन तक प्रति व्यक्ति ₹1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज।
• किसे मिलेगा लाभ: पैदल यात्री, वाहन चालक और सवारी सहित भारत की किसी भी सड़क पर दुर्घटना के शिकार होने वाले सभी नागरिक। वाहन बीमित हो, बिना बीमा का हो या हिट-एंड-रन का मामला हो—इलाज नहीं रुकेगा।
• हेल्पलाइन और एकीकरण: दुर्घटना होने पर 112 (ERSS) पर कॉल करने पर सिस्टम तुरंत नजदीकी एंबुलेंस और नामित या आयुष्मान भारत से जुड़े अस्पताल से जोड़ देता है।
* समयबद्ध उपचार पर ज़ोर: यह योजना समय पर चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, क्योंकि लगभग 50% सड़क दुर्घटना मृत्यु को रोका जा सकता है यदि पीड़ितों को गोल्डन ऑवर (गंभीर चोट के बाद का पहला घंटा) के भीतर अस्पताल में उपचार मिल जाए।
कैशलेस उपचार एवं कवरेज: किसी भी सड़क (जैसे– राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य सड़कें एवं शहरी मार्ग) पर दुर्घटनाग्रस्त पीड़ितों को पहले 7 दिनों के लिये प्रति व्यक्ति ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा।
पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन: गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार की गारंटी प्रदान की जाती है।
कार्यान्वयन एवं पहुँच: यह एक प्रौद्योगिकी-आधारित ढाँचे के माध्यम से संचालित होती है, जो दुर्घटना की सूचना से लेकर दावे के निपटान तक एक निर्बाध डिजिटल संपर्क स्थापित करता है, जिसमें निम्नलिखित का समेकन किया गया है।
वित्तपोषण तंत्र: अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से किया जाएगा। यदि दोषी वाहन बीमित है, तो राशि का वहन सामान्य बीमा कंपनियों के अंशदान से किया जाएगा। वहीं, बिना बीमा वाले तथा हिट-एंड-रन मामलों में व्यय भारत सरकार के बजटीय प्रावधान से पूरा किया जाएगा।
आपातकालीन प्रतिक्रिया एकीकरण: यह योजना इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) डायल 112 के साथ एकीकृत है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति (पीड़ित या गुड समैरिटन) एंबुलेंस सेवा का अनुरोध कर सकता है तथा निकटतम नामित अस्पताल का पता लगा सकता है।
शिकायत निवारण: पीड़ितों की शिकायतों के समाधान हेतु ज़िला स्तरीय जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। इसके लिये ज़िला सड़क सुरक्षा समिति (जिसकी अध्यक्षता ज़िला कलेक्टर/ज़िला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त द्वारा की जाती है) द्वारा नामित एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया जाता है।