Tuesday, 14 April 2026
Breaking News
वृिद्धम ने किया मेगा फ्री एस्ट्रो कंसल्टेशन इवेंट का भव्य आयोजन विद्यार्थी अपनी क्षमता को पहचाने और दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करें : डॉ. अनीता खोसला सांसद साहनी के निजी सदस्य विधेयक ऑनलाइन हेट स्पीच (प्रिवेंशन) बिल, 2024 को संसद में प्रस्तुत किए जाने की राष्ट्रपति ने स्वीकृति प्रदान की जीरकपुर के ढकोली में ​खुला बचपन प्ले स्कूल अमरावती क्रिकेट एकेडमी और कुरुक्षेत्र क्रिकेट एकेडमी ने अपने-अपने लीग मैच जीते मठ मंदिर की रथ यात्रा के दौरान हरे कृष्णा-हरे राम व जय राधा-माधव के जयकारों से गूंज उठा शहर श्री साई धाम, सेक्टर 29 में गोपाल काला दही हांडी उत्सव का हुआ आयोजन हल्लोमाजरा में गैस कनेक्शन बंद होने से लोग परेशान, प्रशासन से जल्द समाधान की मांग गौड़ीय मठ का सनातन सेवा में योगदान सराहनीय : गुलाब चंद कटारिया हरियाणा में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल, 63 आईएएस और एचसीएस इधर से उधर
राष्ट्रीय Trending

अयोध्या में लंगर सेवा हेतु पंजाब से निहंग रसूलपुर की अगुवाई में जत्था राशन लेकर हुआ रवाना

Read in:Hindi

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर द्वारा अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को होने वाले भव्य राम मन्दिर के उद्घाटन मौके वहां पहुंचने वाले दुनियाभर के श्रद्धालुओं के लिए लंगर की सेवा शुरू करने का जो संकल्प लिया गया था, उस लंगर सेवा के लिए उनकी अगुवाई में चंडीगढ़ से राशन व् अन्य साजो सामान के 2 ट्रक रवाना किये गए। यह उल्लेखनीय है कि बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर अगुवाई 1885 में बाबरी ढांचे पर कब्जा कर हवन करने वाले निहंग बाबा फ़क़ीर सिंह के आठवें वंशज हैं।
सेक्टर 26 स्थित ग्रेन मार्किट से राशन के 2 ट्रकों का जत्था रवाना करते हुए निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने बताया कि ना सिर्फ उनके पूर्वजों की भी भगवान राम के प्रति सच्ची श्रद्धा व आस्था रही है बल्कि उनकी भी उतनी ही है और इसी कारण उन्होंने कहा कि अब जब 22 जनवरी 2024 को श्री राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही तो वे पीछे कैसे रह सकते हैं इसलिए निहंग सिंहों के साथ अयोध्या में लंगर लगा देश विदेश से आने वाली संगत की सेवा करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी 14 जनवरी माघी के शुभ अवसर पर अयोधया में लंगर सेवा कि शुरुआत कर दी जाएगी, जो कि निरंतर जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि सिखों का लंगर कि सेवा करने का बहुत बड़ा इतिहास है। उन्होंने बताया कि आदि गुरु नानक देव जी ने लगभग 15 वीं शताब्दी में लंगर की शुरुआत की थी। गुरु नानक जहां भी गए, जमीन पर बैठकर ही भोजन करते थे। ऊंच-नीच, जात-पात और अंधविश्वास को समाप्त करने के लिए सभी लोगों के एक साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा शुरू की। तीसरे गुरु अमरदास जी ने लंगर की इस परंपरा को आगे बढ़ाया।