Monday, 19 October 2026
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'शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा'

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(MOREPIC1) मनमोहन सिंह

जगदंबा प्रसाद मिश्र हितैषी की 1916 या 1917 में लिखी ये पंक्तियां आज भी याद हैं। खास कर आज के दिन जब हम अपने शहीदों को याद कर रहे हैं, इन पंक्तियों को दोहराना ज़रूरी है। क्योंकि जो देश अपने शहीदों और उनके इतिहास को याद नहीं रखते उन्हें फिर इतिहास भी याद नहीं रखता। तबाह हो जाते हैं वे मुल्क।

लेकिन हम आज पूरी श्रद्धा से सर झुका कर अमर शहीद भगत सिंह,शिव राम राजगुरु और सुखदेव थापर को याद कर रहे हैं। जिन्हें उस समय की अंग्रेज़ी हुकूमत ने डर और घबराहट में सभी परंपराएं तोड़ कर आज ही के दिन संध्या के समय फांसी पर लटका दिया था।

वे लोग चले गए पर विचार नहीं मरा करते। उनकी शहादत और उनके विचार आज भी हमारी नौजवान पीढ़ी के लिए 'लाईट हाऊस' हैं। आज इन तीनों को गए 95 साल गुज़र चुके हैं लेकिन जो सपने इन्होंने आज़ाद भारत के लिए देखे थे वे पूरे नहीं हुए हैं। उनके सपनों का भारत हमें बनाना है। देश के लिए मरने वाले सभी शहीदों को नमन।

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