Tuesday, 21 April 2026
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अवैध खनन कराने वाले, रोयल्टी न ले सकने वाले अधिकारियों के विरुद्ध होगी कार्यवाही: जौड़ामाजरा

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अमृतसर, फेस2न्यूज:
पंजाब के जल संसाधन, खनन एवं भू-विज्ञान और भूमि एवं जल संरक्षण मंत्री चेतन जौड़ामाजरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध खनन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध खनन में शामिल और रोयल्टी न ले सकने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
अमृतसर में माझे के विधायकों और जल संसाधन, खनन एवं भू-विज्ञान और भूमि एवं जल संरक्षण विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि बड़े प्रोजेक्टों में इस्तेमाल की जा रही मिट्टी की रोयल्टी भी सरकारी खजाने में जमा करवाना सुनिश्चित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में सैंकड़ों किलोमीटर नेशनल हाईवे बन रहे हैं परन्तु इनकी रोयल्टी पूरी तरह जमा नहीं हो रही। इसलिए इन कार्यों पर निगाह रखकर इसकी बनती रोयल्टी ली जाए। उन्होंने सख़्त लहजे में कहा कि जिस भी अधिकारी ने अवैध खनन और रोयल्टी के मुद्दे पर ढील इस्तेमाल की उसके खि़लाफ़ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
पिछले खरीफ सीजऩ में नहरी पानी खेतों तक पहुँचाने सम्बन्धी विवरण लेते हुए स. जौड़ामाजरा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार भूजल को आने वाली पीढिय़ों के लिए बचाने के प्रयास कर रही है और यह काम केवल और केवल नहरी पानी का प्रयोग करके ही हो सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर कोई कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने इस गंभीर मुद्दे को अनसुना किया, जिस कारण नहरी पानी का सारा ढांचा लगभग तबाह हो गया था, जिसको इस खरीफ सीजऩ के दौरान पूरी तरह से पटरी पर लाकर हरेक खेत तक नहरी पानी पहुँचाया जाएगा।
उन्होंने यह भी हिदायत की कि सीजऩ के बिना जब नहरों, नालों में आने वाला पानी फसलों के लिए नुकसानदेय साबित होता है, उसका प्रयोग भूजल की रिचार्जिंग के लिए करने की योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी कोई भी काम लम्बित न रखें, बल्कि जो काम उनके अंर्तगत नहीं हो सकते, उसके लिए बड़े अधिकारियों के साथ लगातार सम्पर्क कायम कर यह काम पूरे किए जाएँ ताकि हरेक खेत तक नहरों का पानी समय पर पहुँचाया जा सके।
नहरों, नालों और ड्रेनों की सफ़ाई संबंधी स. जौड़ामाजरा ने बताया कि सरकार ने इस कार्य के लिए 10 बड़ी मशीनों की खरीद ली हैं एवं अगर और ज़रूरत महसूस हुई तो और मशीनरी खरीदकर यह काम पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले सरकारें यह काम ठेकेदारों से करवाती थीं, जो काम की खानापूर्ती करते थे, परन्तु अब मशीनें खरीदने के ख़र्च में 60 प्रतिशत की बचत हुई है और काम भी बढिय़ा होने लगा है।