Tuesday, 14 April 2026
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छात्र को फीस नहीं लौटाना कोचिंग संस्थान को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना

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चंडीगढ/अजमेर, संजय कुमार मिश्रा:
अजमेर शहर के एक कोचिंग संस्थान को छात्र की बकाया फीस नहीं लौटाना भारी पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने एक परिवाद का निस्तारण करते हुए कोचिंग संस्थान को ब्याज सहित 42500 की फीस लौटाने के साथ ही ₹7000 जुर्माने के आदेश किए हैं।
मामले के अनुसार धोलाभाटा निवासी मुकेश चौहान ने एडवोकेट तरुण अग्रवाल के जरिए जिला उपभोक्ता आयोग अजमेर में परिवाद पेश कर बताया कि उसने अपने पुत्र प्रखर चौहान का एडमिशन श्रीनगर रोड़ स्थित सेल्सियस इंस्टीट्यूट में दिनांक 26.05.2022 को दो वर्षीय इंटीग्रेटेड क्लासरूम कोर्स में करवाया था। इस कोर्स के अंतर्गत कोचिंग संस्थान द्वारा ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा की तैयारी के साथ नीट ऑफलाईन की तैयारी करवानी थी। इस हेतु इंस्टीट्यूट द्वारा स्कॉलरशिप तथा नेगोसिएशन के बाद कुल फीस राशि रुपए 1,65,000/- तय की गयी। परिवादी ने यह राशि इंस्टीट्यूट को तीन किश्तों में अग्रिम नगद जमा करवा दी थी। संस्थान में प्रवेश लेने के कुछ दिनों बाद ही प्रखर ने पाया कि इंस्टीट्यूट में वह सुविधाएं, मानक तथा मापदण्ड नहीं है जो उसके द्वारा प्रवेश से पूर्व बताए गए थे। प्रखर ने एक वर्ष का कोर्स करने के बाद कोचिंग संस्थान में जाना बंद कर दिया जिसकी सूचना इंस्टीट्यूट को दे दी गयी थी। परिवादी ने बताया कि उसने कोचिंग संस्थान के निदेशक से बकाया एक वर्ष की फीस का रिफण्ड करने का अनुरोध किया तो उनके द्वारा मात्र रुपए 40,000/- ही लौटाए गए जबकि एक वर्ष की रिफण्ड राशि रुपए 82,500/- बनती थी। परिवादी द्वारा बकाया फीस राशि रुपए 42,500/- रिफण्ड करने का अनुरोध किया तो इंस्टीट्यूट द्वारा मना कर दिया गया। परिवादी मुकेश चौहान द्वारा अपने अधिवक्ता के जरिए भी इंस्टिट्यूट को विधिक नोटिस डाक व ईमेल के जरिए भिजवाया जिसका भी कोचिंग संस्थान द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया मजबूरन उसे उपभोक्ता आयोग की शरण लेनी पड़ी।
कोचिंग संस्थान की तरफ से आयोग में कोई उपस्थित नहीं हुआ और एक पक्षीय कार्यवाही की गई।
परिवादी द्वारा परिवाद के साथ प्रस्तुत मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर परिवाद स्वीकार करते हुए आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा, सदस्य दिनेश चतुर्वेदी व जय श्री शर्मा ने शिकायत संख्या 108 ऑफ 2023 को 3 अक्टूबर को निस्तारित करते हुए कहा कि, एक वर्ष की बकाया रिफंड योग्य राशि 42 हजार 500 रु 9% वार्षिक ब्याज दर से तथा मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति पेटे रुपए पांच हजार एवं परिवाद व्यय रुपए दो हजार दो माह की अवधि में अदा करने के आदेश किए हैं।
उल्लेखनीय है कि मात्र तीन माह की अवधि में इस प्रकरण का निस्तारण कर परिवादी को न्याय प्राप्त हुआ है।