Wednesday, 15 April 2026
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जीएसटी रिटर्न फाइल करने वाले प्रोफेशनल्स को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: हाई कोर्ट

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चंडीगढ, संजय मिश्रा:
अगर सीजीएसटी/एसजीएसटी के आयुक्त का मानना है कि किसी व्यक्ति ने अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक निश्चित अपराध किया है तो उसे किसी भी अधिकृत सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिकारी द्वारा जीएसटी के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है।
अधिकारी सम्बंधित कंपनी के मालिक एवं उस कंपनी के फुल टाइम लेखाकार कर्मचारी को हिरासत में ले सकते है।
लेकिन क्या किसी पेशेवर जीएसटी अधिवक्ता या चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी सिर्फ इस बिना पर गिरफ्तार किया जा सकता है कि उसने असेसी का जीएसटी रिटर्न दाखिल किया है? तो इसका जवाब है “नही”
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अखिल क्रिशन मग्गू बनाम डिप्टी डायरेक्टर, जीएसटी निदेशालय (CWP No.24195 of 2019(O&M)) में अपने निर्णय दिनांक 15 नवम्बर 2019 में साफ़ कहा है कि –
10.1. The persons who are having established manufacturing units and paying good amount of direct or indirect taxes; persons against whom there is no documentary or otherwise concrete evidences to establish direct involvement in the evasion of huge amounts of tax, should not be arrested prior to determination of liability and imposition of penalty. Similarly, arrest of Chartered Accountant or Advocates who had filed returns or otherwise assisted in business but are not beneficiary or part of fraud merely on the basis of statement without any corroborative evidence linking the professional with alleged offence should be avoided. It is well known that if top brass of a running concern is arrested, there are all possibilities of closure of unit which results into unemployment and wastage of precious natural resources.
जीएसटी अधिनियम या किसी अन्य प्रावधान के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को कुछ कानूनी अधिकार प्राप्त है, जिसे वो इस्तेमाल कर सकता है।
पूछताछ या गिरफ्तारी के दौरान आईओ को दिए गए बयानों से पीछे हटने का अधिकार:
जब किसी अभियुक्त द्वारा आईओ या किसी अन्य प्राधिकरण के समक्ष कोई बयान दिया जाता है, तो ऐसे बयानों को दबाव में या बलपूर्वक लिया जाता है, तो ऐसे बयानों को या तो जेल अधीक्षक के समक्ष या संबंधित न्यायालय के समक्ष ऐसा बयान देकर वापस लिया जा सकता है।
ज्ञात हो कि, संजय माहेश्वरी बनाम सीमा शुल्क आयुक्त के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने वापस लेने वाले बयानों की पवित्रता को बनाए रखते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि:,
“एताजुद्दीन बनाम भारत संघ 2015 (317) 177 (एससी) में सर्वोच्च न्यायालय जहां यह माना गया था कि पुलिस या प्रवर्तन कार्यालय के छापे के दौरान या समकालीन रूप से दिए गए बयान संदिग्ध हैं और यदि ऐसे बयान बाद में वापस ले लिए जाते हैं, तो वे “तत्काल विश्वसनीय नहीं होना चाहिए, जब तक कि स्वतंत्र स्रोतों के माध्यम से उक्त बयानों के कुछ भौतिक पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि न हो.” यह आगे प्रस्तुत किया गया है कि विभाग द्वारा दर्ज किए गए अभियुक्तों के बयानों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत आवेदक के खिलाफ नहीं पढ़ा जा सकता है, जो स्पष्ट रूप से बताता है कि “किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।”
आरोपी संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने पर अपने बयान से मुकर सकता है, क्योंकि गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर विभाग को आरोपी को संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है अन्यथा गिरफ्तारी को Cr. PC की धारा 167(2) के अनुसार अवैध करार दिया जा सकता है।