Monday, 01 June 2026
Breaking News
अहिंसा शिक्षा रत्न अवॉर्ड 2026 में ट्राइसिटी के लगभग 130 मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान बशीर बद्र की ग़ज़लों की हिंदी में पहली किताब अबोहर में हुई थी प्रकाशित स्वर सप्तक कल्चरल सोसाइटी ने आयोजित की रवींद्र-नज़रूल संध्या कुरुक्षेत्र क्रिकेट अकादमी, हरियाणा ने पहली 'श्री माता मनसा देवी ट्रॉफी' अंडर-14 संयुक्त (लड़के/लड़कियां) क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब जीता अलविदा बशीर बद्र उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावनाः मुख्यमंत्री श्री अमृतेश्वर महादेव मंदिर स्थापना दिवस की धूम : गायक बी प्राक की भजन संध्या में उमड़ा जनसैलाब चुनाव-2026: जगह-जगह टकराव, मतदान के बाद शहर में तनाव। देव भूमि हिमाचल में धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता: राज्यपाल सिद्ध बाबा बालक नाथ मन्दिर का 52वां वार्षिक उत्सव 27 से
चंडीगढ़ Trending

डॉ राजेंद्र कुमार कनौजिया की नवीनतम पुस्तक मेरी प्रिय कहानियां का हुआ विमोचन

Read in:Hindi

फेस2न्यूज/चण्डीगढ़ 

साहित्यिक संस्था अभिव्यक्ति, सृष्टि प्रकाशन और सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वाधान में सेक्टर 17 की लाइब्रेरी में डॉ राजेंद्र कुमार कनौजिया की नवीनतम पुस्तक मेरी प्रिय कहानियां का विमोचन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रतन चंद रत्नेश ने की।

संग्रह में प्रकाशित कहानियों पर विजय कपूर, डॉ. दलजीत कौर और डाॅ. अश्वनी शांडिल्य ने अपने विचार रखे। डॉ दलजीत कौर ने संग्रह की सभी कहानियों पर संक्षिप्त टिप्पणी की, जबकि विजय कपूर और डॉ. शांडिल्य ने इन कहानियों के सकारात्मक पक्ष, कथ्य और भाषा-शैली पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि कहानियाँ सामाजिक चेतना से जुड़ी हुई हैं और साथ ही मानव मूल्यों में होते ह्रास को रेखांकित करती हैं।

संवेदनशील कहानीकार समाज के निचले स्तर और दबे-कुचले लोगों के प्रति हो रहे शोषण से विचलित होता रहता है, इसकी झलक अदृश्य चेहरे और जोकर में देखी जा सकती है। जोकर में बकायदा व्यंग्यात्मक शैली में कहा गया है कि समाज में हम सब जोकर ही हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कौन किसका जोकर बनता है।

बरगद के फूल संग्रह की बेहतर कहानियों में से एक है जिसमें घर के बुजुर्ग के अपने जैसे एक बुजुर्ग पेड़ को कटने से बचाने की कश्मकश परिलक्षित होती है। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य मे रतन चंद रत्नेश ने कहानियों, लघुकथाओं और पत्रिकाओं में प्रकाशित पेंटिग्स के माध्यम से डॉ. कनौजिया का परिचय कराते उनकी बीस वर्ष पूर्व लिखी रचनाओं का जिक्र किया और उनकी एक लघुकथा घरौंदा सुनाते हुए संग्रह की विशेषकर चार कहानियों शिनाख्त, खानाबदोश, टूटते पुल-दरकती दीवारें और दीमक की ओर ध्यान खींचा जिनमें अतीत की आहटें सुनाई देती हैं।

इनका संबंध शहरयार की एक ग़ज़ल ये क्या जगह है दोस्तों, यह कौन सा दयार है से जोड़कर सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने की चाहत में पीछे क्या कुछ छूट जाता है, यह इन कहानियों में बखूबी झलकता है। इन कहानियों की भावभूमि एक होने के बावजूद इनके ट्रीटमेंट में विविधता को उन्होंने रेखांकित किया।