Friday, 24 July 2026
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वास्तु के अभाव का प्रभाव

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(MOREPIC1)  मोनिका कम्बोज

हमारे चारों ओर लगातार नकारात्मक या सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता रहता है फर्क सिर्फ इतना है कि हम उन्हें महसूस नहीं कर पाते, ये भी कह सकते हैं कि बिना ज्ञान के हम उनको देख नहीं पाते या उनका पता नहीं लगा पाते, वास्तु शास्त्र में इसी प्रकार की अदृश्य प्राकृतिक शक्तियां में समवय को साधने का कार्य किया जाता है।

कैसे कार्य करता है वास्तु

वास्तु कला या ज्ञान कलयुग की खोज नहीं है दरअसल वास्तु कला के बारे में हजारो साल पहले ही हमारे वेदों में लिख दिया गया था प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में वास्तु के कई सिद्धांत मिलते हैं बस फर्क सिर्फ इतना है कि आज हम पाश्चात्य सभ्यता पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं और इसके विपरीत पश्च्मि सभ्यता के लोग हमारे ग्रंथों, वेदों पुराणों का अध्यन कर रहे है।

ये बात तो विज्ञान भी मानता है की हर वस्तु स्थान की एक ऊर्जा होती है और हमारे चारों ओर ये ऊर्जा सकारत्मक या नकारामक रूप में मौजूद होती है। यह उर्जा स्थान और वातावरण विशेष की ओर आकर्षित होती है। नकारात्मक स्थान अशुभ उर्जा और सकारात्मक स्थान शुभ ऊर्जा को अपनी और आकर्षित करता है। हमने अपनी जीवन में कभी न कभी तो रेडियो एफम सुना होगा या कुछ लोग तो लगातार सुनते ही हैं।

(SUBHEAD)आपने देखा होगा कि एफम में अलग अलग फ्रीक्वेंसी पर अलग अलग रेडियो स्टेशन के प्रोग्राम हम सुनते हैं ऐसा क्यों होता हैं कि एक निश्चित फ्रीक्वेंसी पर हम एक निश्चित चैनल ही सुनते हैं दूसरा नहीं, होता यह है कि सभी एफम चैनल्स की आवाज़ हमारे आसपास से ही गुजरती हैं लेकिन जब हम एफम रेडियो को निश्चित फ्रीक्वेंसी पर लगाते हैं तो उसी चैनल को पकड़ता है जो उसी फ्रीक्वेंसी पर सेट है लेकिन किसी अन्य चैनल या फ्रीक्वेंसी पर नहीं, कहने का मतलब यह है कि प्रकृति ने ऊर्जा के लिए भी फ्रीक्वेंसी फिक्स की हुई है अगर किसी ऊर्जा को उसकी प्राकृतिक रूप से फिक्स की हुई फ्रीक्वेंसी मिल जाए तो वह उसका बहुत अच्छा रिजल्ट दिखाएगी, जैसे की एफम में अगर कोई फिक्स फ्रीक्वेंसी नहीं मिलती तो चैनल लगाने पर अजीब अजीब सी आवाज़ सुनती है जिससे कि हमारा दिमाग भी अशांत हो जाता है उसी प्रकार वास्तु में दिशाओं को अगर उनके फिक्स एनर्जी नहीं मिलती तो वह भी डिस्टर्ब हो जाती है उदाहरण के तौर पर वास्तु में उत्तर दिशा को जल की दिशा कहा गया है और उत्तर दिशा में नीले व काले रंग को उचित माना गया है।

यदि उत्तर दिशा में किसी तरह से लाल रंग की उपस्थिति होगी तो यह दिशा अपना संतुलन खो देगी जैसे रेडियो में सही फ्रेक्वेंसी न मिलने पर रेडियो बेसुरा सुनाई देता है वैसे ही वास्तु में यदि किसी भी दिशा में उसके स्वभाव के विपरीत तत्व या रंग का इस्तेमाल होगा तो वो दिशा भी बेसुरी हो जाएगी और अपना कार्य ठीक से नहीं कर पायेगी, जैसे पानी का खास गुण है प्यास बुझाना, हवा का गुण है शीतलता देना और अन्न का गुण भूख को तृप्त करना वैसे ही वास्तु में हर दिशा का अपना एक गुण होता है, उत्तर दिशा का गुण है जीवन में व्यपार या नौकरी के अच्छे मौके देना और पूर्व दिशा समाज के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने के लिए जिम्मेदार है, यदि इन दिशाओं में किसी प्रकार से वास्तु दोष उत्त्पन होता है तो जीवन में अच्छे अवसरों की कमी बनी रहती है और समाज में भी मान सम्मान का अभाव बना रहता है।

वास्तु क्यूँ जरूरी है

हमारे शरीर के सभी अंग एक निश्चित जगह पर होते हैं तो हमारे रूप को एक आकार मिलता है यदि एक भी अंग अपनी जगह से विपरीत होगा तो आकार बिगड़ जायेगा ठीक वैसे ही वास्तु में हर दिशा का अपना तत्व अपना रंग और गुण होता है यदि किसी भी एक दिशा का तत्व विपरीत दिशा में होगा तो उसके असर उस भवन में रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है।

हर मनुष्य की इच्छा होती है की उसके घर में सुख व सकारत्मक ऊर्जा का वास् हो और जहां रहने वालो का जीवन सुखद व शांतिमय हो इस लिए अनिवार्य है के घर का निर्माण वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप हो और जिसमें कोई वास्तु दोष न हो, यदि घर की दिशाओं या भूमि में दोष है तो कितनी भी लागत लगा कर मकान क्यूँ न खड़ा किया गया हो उस घर में वास् करने वालों का जीवन सुखमय नहीं होगा|  (मोनिका कम्बोज वास्तु विशेषज्ञ हैं , उनसे संपर्क  किया जा सकता है:  anikamonikakamboj@gmail.com )