Saturday, 17 October 2026
Breaking News
पंचकूला में गुजरात का रंग, गरबा के संग—होटल पल्लवी ग्राउंड में उमड़ा उत्साह, रास गरबा महोत्सव में सजी सांस्कृतिक उल्लास की भव्य महफिल चंडीगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, इंद्रेश महाराज के प्रवचनों और भजनों से कृष्णमय हुआ शहर लता मंगेशकर और जगजीत सिंह की याद में संगीत कार्यक्रम महफिल-ए-म्यूजिक का आयोजन 17 को सद्भावना कमेटी, पीयू कैंपस द्वारा 17 अक्टूबर को होगा 33वीं शाम मां के नाम जागरण का आयोजन जालंधर की विशाल तीर्थयात्रा में शामिल होंगे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  साईं मंदिर में बाबा के महासमाधि दिवस पर भक्तजनों ने स्वयं कराया बाबा को मंगल स्नान चण्डीगढ़ गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्ज यूनियन ने विशाल गेट रैली करके चुनावी बिगुल बजाया श्रीमद्भागवत कथा एवं तृतीय वृंदावन प्राकट्य उत्सव का भव्य आयोजन 16 अक्टूबर से भगवान श्री वाल्मीकि जी की पावन ज्योति का राम दरबार में भव्य स्वागत कानूनी साक्षरता और हमारा संविधान: एक सशक्त और अपराध-मुक्त भारत की नींव
मनोरंजन Trending

जीवन का आनंद दोस्तों के संग

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

” एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तो
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तो “

1967 में आई फिल्म “गबन” के गीत के इस मुखड़े का अर्थ धीरे धीरे समझ में आता है। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास गबन पर आधारित फिल्म का यह गीत महान गीतकार हसरत जयपुरी की कलम से निकला और शंकर जयकिशन ने इसे सुरों में ढाला। मोहम्मद रफी की मखमली आवाज़ ने इसे अमर बना दिया।

कल मेरा जन्मदिन था। स्कूल, कॉलेज के मेरे दोस्तों में एक अलग ही उत्साह था मैं भी उत्साहित था। सोशल मीडिया पर लगातार बधाई संदेश आ रहे थे। मैं व्यक्तिगत तौर पर सभी का धन्यवाद करने में असमर्थ था तो मैं अपने इस लेख के माध्यम से सभी का आभार व्यक्त करता हूं। दोस्तों में उत्साह का कारण मेरे जन्मदिवस से अधिक यह था कि हम सभी को एक दूसरे से मिलने का बहाना मिल गया था। खूब गपशप हुई। मेरी समस्या यह है कि मेरे जन्मदिवस पर जो आयोजन दोस्तो खास तौर से मेरे कॉलेज के दिनों के साथियों ने किया उसके लिए मैं किसी एक का नाम नहीं ले सकता। पूरी टीम थी।

हालांकि बातें तो वही थी जो हम हर बार दोहराते हैं। वही क्लास में की गई शरारतें, वही हमारे प्रोफेसर्स का पढ़ाने का स्टाइल, वही चाची की कैंटीन, वही कॉलेज में हुई मार पीट, वगैरा वगैरा, लेकिन उन्हें दोहराने का आनंद और था। ज़िंदगी ने सिखाया है कि कॉलेज या स्कूल में जिस लड़का, लड़की, से आप लड़ते झगड़ते हैं, मर पीट तक हो जाती है, बढ़ती उम्र के बाद उसी को ढूंढते फिरते हैं।

लोग कहते हैं कि फलां आदमी बहुत सफल है उसने कुबेर का खजाना इक्ट्ठा कर लिया, फलां आदमी बहुत बड़ा राज नेता, अफसर या व्यापारी बन गया। आज दुनिया में सफलता के यही पैमाना है, पर मेरे हिसाब से सबसे अधिक सफल, और किस्मत वाला वह है जिस के पास दशकों पुराने दोस्तों का खज़ाना है। जो अपने सहपाठियों को बीच बाज़ार “तू” कहकर बुला सकता है, उसे दोस्त के घर जाने के लिए फोन पर अपॉइंटमेंट नहीं लेनी पड़ती। कोई औपचारिकता, कोई प्रोटोकॉल नहीं। रात के दो बजे हों या सुबह के चार, वह जा कर दोस्त के घर की घंटी बजा सकता है उसका दरवाज़ा खटखटा सकता है।

लोग कहते हैं कि आज किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है। यही तो है जिसने जीवन में सारी बीमारियां भर दी हैं। बदनसीब हैं वे जिन्हें हंसने के लिए भी पार्कों में इकट्ठा होना पड़ता है । फिर वहां बनावटी हसी हंस कर हंसने का कोटा पूरा करते हैं। अरे यार, ढूंढो अपने सहपाठी। जब सहपाठी साथ होंगे तो तनाव, बीमारी सभी दूर रहेंगे।

अस्पताल की बजाए दोस्तों के घर जाओ। यही इलाज है हर बीमारी का। वैसे जापान के एक गांव की मिसाल भी इसके बारे में दी जाती है। खुशी चाहिए तो बस सहपाठी ढूंढो।

0 Comments