Wednesday, 10 June 2026
Breaking News
आप विधायक की शह पर करोड़ों रुपए की फसलें लूटने का आरोप, मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार हिमाचल महासभा की कार्यकारिणी की बैठक में भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा की तय  एस्पायर संस्थान 15 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को प्रदान करेगा निःशुल्क कोचिंग मुख्यमंत्री ने ‘एस्पायर टैलेंट हंट’ का पोस्टर जारी किया प्रथम स्वर्गीय चौधरी भजन लाल ट्रॉफी उत्तर क्षेत्र अंडर-14 संयुक्त लड़के एवं लड़कियों का क्रिकेट टूर्नामेंट 17 जून से पंचकूला में सजा श्री बालाजी महाराज का दिव्य दरबार, महंत दिनेश पुरी महाराज ने श्रद्धालुओं की समस्याओं का किया समाधान किसी को मुझे आज़माना नहीं है प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, सुरक्षित और हरित भविष्य की नींव है : कमांडेंट कमल सिसोदिया 5 सिग्नल बटालियन, केरिपुबल, हैल्लोमाज़रा में किया गया वृक्षारोपण डेराबस्सी ओवरब्रिज के नीचे 'अवैध बस्ती', बाथरूम तक बने, प्रशासन ने मूंदी आंखें ओआरसी सैनिक अकादमी के दो छात्रों का राष्ट्रीय सैनिक विद्यालयों में चयन
हिमाचल Trending

भारतीय संस्कृति से जुड़ी मान्यताओं एवं परम्पराओं को आगामी पीढ़ी तक ले जाना आवश्यक: जय राम ठाकुर

Read in:Hindi

मुख्यमंत्री ने गेयटी थियेटर में आयोजित भारतीय नव संवत्सर परम्परा उत्सव की अध्यक्षता की

(MOREPIC1)शिमला : मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज शिमला के गेयटी थियेटर में ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी, जिला हमीरपुर एवं हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय नव संवत्सर परम्परा उत्सव की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि आज से भारतीय नव संवत्सर प्रारम्भ हो रहा है। मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की रचना चैत्र प्रतिपदा के दिन हुई थी। देशभर में यह उत्सव अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। हिमाचल प्रदेश में चैत्र मास का अपना अलग ही महत्व है और एक माह तक लोक गायक घर-घर जाकर पारम्परिक गीतों के माध्यम से चैत्र माह की बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि पौराणिक काल गणनाओं का प्रभाव आज भी प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में दृष्टिगोचर हो जाता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति से जुड़ी मान्यताओं एवं परम्पराओं का प्रस्तुतिकरण आवश्यक है ताकि इन्हें आगामी पीढ़ी तक ले जाया जा सके। नव संवत्सर के साथ जुड़ी धारणाएं व विचारों का महत्व युवा पीढ़ी को बताना होगा, तभी इन आयोजनों का उद्देश्य सफल हो सकेगा।

इस अवसर पर डॉ. रवि आर्य ने भारतीय कालगणना तथा डॉ. चेतराम गर्ग ने नव संवत्सर परम्पराः इतिहास एवं संस्कृति, डॉ. कृष्ण मोहन पाण्डेय ने नव संवत्सर परम्परा का वैश्विक स्वरूप तथा डॉ. ओमप्रकाश शर्मा ने हिमाचल में नव संवत्सर परम्परा विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत किया।

हिमाचल प्रदेश कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें हेमराज चन्देल एवं डॉ. लाल चन्द ने नव संवत्सर परम्परा गायन चैती गीत तथा गोपाल शर्मा धामी ने लोक रामायण की प्रस्तुति दी सचिव भाषा, कला एवं संस्कृति राकेश कंवर, हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी शिमला के सचिव डॉ. कर्म सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।