Tuesday, 12 May 2026
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नो-वेंडिंग जोन को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को मद्देनज़र रखते हुए रद्द किया जाना चाहिए : मनोज शुक्ला

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चण्डीगढ़: रेहड़ी-फड़ी वाले समाज का अभिन्न अंग हैं। अगर कानून की बात की जाए तो किसी भी शहर की आबादी के अनुपात में 2.5 प्रतिशत वेंडर्स का होना जरूरी है और यहां तक कि चण्डीगढ़ के हेरिटेज क्षेत्र में आते पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी जब वेंडर्स को हटाने का मामला उठा तो माननीय अदालत को भी इसमें दखल देते हुए वेंडर्स को हटाने पर रोक लगाने का आदेश पारित करना पड़ा।

ये बातें आज रेहड़ी-फड़ी संघर्ष कमेटी एसोसिएशन के चेयरमैन परमजीत सिंह व अध्यक्ष मनोज शुक्ला ने चण्डीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में शहर के रेहड़ी-फड़ी वालों की समस्याओं से जुड़े हुए विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए कहीं।

(SUBHEAD)उन्होंने कहा कि सेक्टर 1 से 6 तथा सेक्टर 17 में जो नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया है, उसे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को मद्देनज़र रखते हुए रद्द किया जाना चाहिए तथा साथ ही जहां सर्वे के दौरान वेंडर्स काम कर रहे थे, उन्हें वहीं कार्यरत रहने देना चाहिए। अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर, नॉन-एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर और मोबाइल वेंडर की जो श्रेणियां प्रशासन ने तय की हैं, उनमें संशोधन की जरूरत है।

जैसे जूस वालों को एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर की श्रेणी में रखा जाना चाहिए क्योंकि आजकल स्वास्थ्य कारणों से जूस का सेवन करना अति आवश्यक हो गया है। इसलिए जूस वालों को इस श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए।

गोलगप्पे-टिक्की वाले भी इस श्रेणी के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने आगे कहा कि सर्वे में धांधली की वजह से ओरिजिनल वेंडर सर्वे से वंचित रह गए थे। हर 5 साल बाद सर्वे का कानूनन प्रावधान है, इसलिए सर्वे दोबारा कराया जाए।

टूरिस्ट प्लेस में जो भी वेंडर्स हैं, उन्हें वहीं पर व्यवस्थित किया जाना चाहिए व टूरिस्ट पैलेस के लिए टाउन बिल्डिंग कमेटी द्वारा बैठक कर पॉलिसी बनाई जाए। साथ ही टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक प्रति माह होनी चाहिए, जैसा कि प्रावधान है।
शहर के आबादी के अनुसार 2.5 फीसदी वेंडर्स होने जरूरी, जबकि चंडीगढ़ में ये अनुपातन कम हैं, इसलिए दुबारा सर्वे के माध्यम से इस कमी को पूरा करवाया जाए। लाइसेंस प्राप्त वेंडर्स की जो जगह 4 × 6 है उसे बढ़ाकर 7 × 9 किया जाए। सेक्टर 19, सेक्टर 22, सेक्टर 17 को छोड़कर शहर के सभी वेंडर को फर्स्ट कैटेगरी से निकालकर सेकंड कैटेगरी में डाला जाए ताकि वेंडरों को फीस भरने में आसानी हो सके।

इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी मुकेश गिरी, राजिंदर कौर, रणजीत सिंह, अखिलेश सक्सेना बी बॉबी मेहता आदि भी मौजूद रहे।