दीपक सिंह /चंडीगढ़
‘ग्लोबल आर्ट क्रिएशन्स’ के बैनर तले निर्मित फिल्म ‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ की स्क्रीनिंग यहां महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में आयोजित की गई।
फिल्म को 200 से अधिक दर्शकों ने देखा। इनमें कई विशिष्ट हस्तियां शामिल थीं, जिनमें कर्नल दलजीत सिंह चीमा, कर्नल बी.के. शर्मा, पी.एस. नरूला, अवतार सिंह पतंग, बलकार सिंह सिद्धू, नीरज रायजादा, आर्य समाजी रमेश्वर गुप्ता, भारतीय रेलवे से डॉ. आर.बी. सिंह, परवाणू से जया गोयल, डॉ. रेखा मित्तल, हरपाल सिंह बल्ल, बलविंदर सिंह ढिल्लों, बलजीत ढिल्लों, चरणजीत बाठ, रतन बाबकवाला, पीएनबी से अरविंद गर्ग एवं सुनीता गर्ग, कुलवंत कौर बल्ल, एडवोकेट पी.सी. चोपड़ा एवं श्रीमती चोपड़ा (पठानकोट), मैडम दर्शना पाहवा, शैलेश वर्मा (फाजिल्का), जगजीत सरीन, ओ.पी. वर्मा, सोनिया पंचाल, पाल सिंह और प्रीतम सिंह शामिल थे।
राजिंदरा अस्पताल, पटियाला के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. मनजीत एस. बल्ल ने इस फिल्म की कहानी एवं संवाद लिखे हैं जबकि इंद्रजीत कौर बल्ल इसकी निर्माता हैं।
यह फिल्म व्यवस्था की संवेदनहीनता पर आधारित दिल दहला देने वाली कहानी है। इसमें चिकित्सा, प्रशासनिक और सामाजिक संकटों को अत्यंत कुशलता से आपस में जोड़ा गया है। यह एक प्रभावशाली एवं सामाजिक रूप से प्रासंगिक ड्रामा है, जो व्यवस्था की खामियों, संस्थागत लापरवाही और आम नागरिकों को इसकी भारी कीमत चुकाने की विडंबना पर तीखा प्रकाश डालता है।
सोम सहोता की निर्देशित इस फिल्म की कहानी एक समर्पित पुलिस कांस्टेबल की दुखद नियति के इर्द-गिर्द घूमती है। कांस्टेबल में हृदय रोग के स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उसे ड्यूटी पर बने रहने के लिए मजबूर किया जाता है और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है। फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता बी.एन. शर्मा अतिथि कलाकार के रूप में दिखाई दे रहे हैं।
अन्य सभी कलाकार शौकिया हैं। इनमें मुख्य भूमिकाओं में गुलशन सोनी और गुरविंदर मुल्तानी शामिल हैं। इनके अलावा भरपूर सिंह, आरती बेदी, अनुराधा शर्मा, कुलदीप काजल, बलदेव सनौरी, किशोर शर्मा, जोरा बल्ल, पी.पी. सिंह, अश्वनी शर्मा, कमल बख्शी, दर्शन तियूणा और रमेश अनेजा ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। बाल कलाकारों में सिमरन सहोता, उम्मीद बल्ल और गुलाब बल्ल शामिल हैं। फिल्म के डी.ओ.पी. दयाल किशन हैं तथा संगीत याकूब गिल माजे वाला ने दिया है।
कलाकारों में विशेष रूप से गुलशन सोनी, गुरविंदर मुल्तानी, आरती बेदी, भरपूर सिंह और अनुराधा शर्मा के अभिनय की भरपूर सराहना की गई। इतनी उत्कृष्ट फिल्म बनाने के लिए दर्शकों ने डॉ. मनजीत बल्ल, निर्देशक सोम सहोता और निर्माता इंद्रजीत बल्ल को खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सम्मानित किया।
‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज का आईना साबित होने की क्षमता रखती है। यह दर्शकों को गहन चिंतन, सार्थक संवाद और भावनात्मक रूप से प्रभावित करने वाली एक सशक्त प्रस्तुति है, जो विश्वभर के दर्शकों के दिलों तक पहुंच सकती है।
स्क्रीनिंग में उपस्थित कई विशिष्ट व्यक्तियों ने निर्माता और निर्देशक के इस प्रयास की अत्यंत सकारात्मक शब्दों में सराहना की तथा भविष्य में भी ऐसे सामाजिक विषयों पर फिल्में बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर अन्य शहरों में भी फिल्म की स्क्रीनिंग आयोजित करने के बारे में चर्चा हुई।
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फिल्म ‘पीड़ (दर्द-ए-दिल)’ संवेदनहीनता पर आधारित दिल दहला देने वाली कहानी, की स्क्रीनिंग में पहुंचे कई दिग्गज