Saturday, 12 September 2026
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जीएमसीएच-32 का चंडीगढ़ मॉडल बुजुर्गों में डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता को  दे रहा है बढ़ावा

चंडीगढ़ : भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), नई दिल्ली की ओर से वित्तपोषित तथा जीएमसीएच-32, चंडीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग से संचालित अंतरपीढ़ी डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता पहल को अब उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है।

सामुदायिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिया पुरी के नेतृत्व में संचालित ‘चंडीगढ़ मॉडल’ के तहत किशोरों को डिजिटल मेंटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है, जो वरिष्ठ नागरिकों को आभा आईडी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सेवाओं तथा ई-संजीवनी टेली-कंसल्टेशन जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करने में सहायता करते हैं।

इस मॉडल को मंगलवार को जीएमसीएच-32 में आयोजित ICMR-वित्तपोषित क्षेत्रीय प्रसार कार्यशाला “From Evidence to Action: Scaling the Chandigarh Model of Intergenerational Digital Health Literacy for Healthy Ageing” में प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला में परियोजना के प्रमुख निष्कर्षों के साथ विशेषज्ञ व्याख्यान तथा दो पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें चंडीगढ़ मॉडल के क्रियान्वयन, स्थायित्व और विस्तारपर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में जीएमसीएच-32 की डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रो. रवनीत कौर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल गुलानी, सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक श्री नवीन रट्टू , सामुदायिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिया पुरी, प्रोफेसर डॉ. दिनेश वालिया सहित अन्य विशेषज्ञ एवं पैनलिस्ट उपस्थित रहे।

कार्यशाला में डॉ. जुगल किशोर और डॉ. सुनीला गर्ग के ऑनलाइन व्याख्यान भी हुए। विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ-साथ HopRays, रोटरी क्लब, रिटायर्ड बैंकर्स एसोसिएशन सहित गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामुदायिक हितधारकों ने भी चर्चा में भाग लिया।

डॉ. सोनिया पुरी ने कहा कि यह पहल तकनीक और अंतरपीढ़ी सहयोग को जोड़ती है, जिससे बुजुर्ग डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक आत्मविश्वास से उपयोग कर पाते हैं, जबकि युवाओं में सहानुभूति, संवाद कौशल और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

चंडीगढ़ साइबर क्राइम शाखा के अधिकारियों ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और डिजिटल सुरक्षा पर जागरूकता सत्र भी आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान डिजिटल लिटरेसी वेबसाइट, प्रोजेक्ट फिल्म और डिजिटल लिटरेसी टूलकिट का अनावरण जीएमसीएच-32 की डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रो. रवनीत कौर और आयोजन सचिव डॉ. सोनिया पुरी द्वारा किया गया। यह पहल चंडीगढ़ मॉडल को समुदाय-आधारित डिजिटल समावेशन और स्वस्थ वृद्धावस्था के एक दोहराए जा सकने वाले मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यशाला में स्वास्थ्य प्रशासकों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने भाग लेकर इस मॉडल को उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

चंडीगढ़ मॉडल का उद्देश्य केवल बुजुर्गों को तकनीक का उपयोग सिखाना नहीं है, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ना, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मजबूत करना और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से स्वस्थ वृद्धावस्था की दिशा में एक स्थायी मार्ग तैयार करना है।