Thursday, 29 October 2026
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गधा बिरादरी का स्वर्णकाल

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

गधा बस गधा होता है। फिर वो चाहे गाली कूचे में हो या मजलिस में। चुनाव जीता हो या हारा हो। अपना चाहे लिवास बदले अपनी चल बदले लेकिन जब बात करेगा तो पता चल ही जाता है कि वो गधा है। गधा बिरादरी की एक और खूबी है कि जो बात एक गधा कहे वही सब बोलते हैं। उनकी मजलिस में असहमति के लिए कोई स्थान नहीं होता।

हमारी खूबी यह है कि हम आपनी ऊलजलूल लेखनी से औरों को भी अपने जैसा बना देते हैं। लोगों को छपी छपाई बात पर एक दम यकीन आ जाता है। क्योंकि खुद का दिमाग तो इस्तेमाल करते नहीं, या यूं कहिए कि अपना दिमाग तो होता नहीं इसलिए वो मेरी या मेरी बिरादरी के किसी भी सदस्य की सोशल मीडिया पर लिखी बात पर यकीन कर लेते हैं। अगर देखा जाए तो यह समय हमारी बिरादरी का स्वर्णकाल चल रहा है।

हर मजलिस, अदालत, शिक्षा संस्थान, नौकरशाही में हमारी बिरादर के लोग बैठे हैं। खासतौर पर सरकार, सिनेमा, साहित्य और हमारी न्यायपालिका में बैठे मेरी बिरादरी के इन लोगों के तर्क सुन कर मुझे अपने गधा होने पर गर्व महसूस होता है। ऐसे ऐसे तर्क गढ़ते हैं कि जो खुद उनकी अपनी समझ से भी बाहर होते हैं।

खैर कोई कुछ कहे आम आदमी हमारी कद्र इस हद तक करता है कि हमारे पैर धो कर पीने को तैयार है। बाकी शिक्षा के नाम पर हमने निजी संस्थानों को अधिकार दिया है कि वे जिसे चाहें जाली डिग्री बेचते रहें तभी हमारी बिरादरी के कई लोग पी एच डी की डिग्री लिए घूम रहे हैं। वे सारे तो नहीं पर उनमें से कई ऐसे हैं जो शायद 10 वीं की परीक्षा भी पास न कर पाएं। पर जब पूरी व्यवस्था ही हमारे हाथ में लोगों ने हमें सौंपी है तो हम क्यों न उसका पूरा लाभ उठाएं।

कल अगर व्यवस्था बदलेगी तो हम भी पाला बदलेंगे। हम गधा बिरादरी से हैं इंसानों की मूर्ख़ बिरादरी से नहीं।हमें अपने वर्ग चरित्र का पता है। हम जात पात, बिरादरी, और मज़हब के नाम पर वोट नहीं डालते। चलो बाद की बाद में सोचेंगे अभी तो अपना स्वर्णकाल चल रहा है। जनता जनार्दन को हमें ताकतवर बनाने के लिए आभार। भगवान जनता को कभी सबुद्धि न दे।

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