(MOREPIC1) राज सदोष/अबोहर
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मनमोहिनीवन परिसर में चल रही पांच दिवसीय सुरक्षा सेवा प्रभाग की नेशनल कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में ब्रिगेडियर हरवीर सिंह ने कहा कि जब भी मेरे सामने कठिन परिस्थिति आई कारगिल युद्ध के दौरान तब मैं हर वक्त परमात्मा की याद में रहता था। परमात्मा की याद से युद्ध में विजय पाई। हमें मेडिटेशन सिखाया गया कि हम सब आत्मा हैं और उस सुप्रीम सॉल की संतान हैं। जब आप इसे रोजाना प्रैक्टिस करते हैं तो हमें कई अनुभव होते हैं। अनुभव होने से तब पता चलेगा कि हम सब सिर्फ माध्यम हैं। जब हम हार्डवर्क, तनाव, मेहनत की बात करते हैं तब हम बॉडी कॉन्शियस में होते हैं। मेडिटेशन सॉल कॉन्शियस होना है।
श्री सनातन जेवा के कोस्ट गार्ड डीआईजी पारादीप ने कहा कि यहां सिखाए जा रहे राजयोगा मेडिटेशन सबसे उत्तम है। हम इसे अपने जीवन में अपनाएंगे। हर क्षेत्र में राजयोग मेडिटेशन की जरूरत महसूस हो रही है।(SUBHEAD)
हिमाचल प्रदेश पूर्व आईजी आईपीएस हिमांशु मिश्रा ने कहा कि मेरा सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि फोर्स के लोग अक्सर जीवन और मौत की परिस्थिति का सामना करते हैं। जिन्हें एक सेकंड से भी कम समय में निर्णय लेना होता है, जो लगातार स्ट्रेस में रहते हैं कि वह अपनी शिफ्ट पूरी करने के बाद जिंदा वापस जा पाएंगे कि नहीं। अगली बार वह अपने परिवार से मिल पाएंगे या नहीं? इसमें आध्यात्म कैसे मदद करेगा? लेकिन ब्रह्माकुमारीज का ज्ञान सुनने के बाद सारी शंकाओं का समाधान हो गया।
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के पूर्व निदेशक रामफल पंवार, लेफ्टिनेंट कर्नल विकास चौहान ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास के बाद मेरा सोचने का नजरिया बदल गया। पहले की अपेक्षा क्रोध कम हुआ है और ज्यादा खुश रहता हूं। कर्नल बीके सती ने भी राजयोग से जुड़े अपने अनुभव सांझा किए।