चंडीगढ, संजय कुमार मिश्रा:
वैसे तो ये बहुत पुराना इतिहास है कि प्रशासन आम लोगों की ना तो सुनता है ना ही उसके द्वारा दिए गए शिकायतों पर ध्यान देता है, ना ही कोई कार्रवाई करता है। प्रशासन सुनता है तो सिर्फ दो लोगों की, एक तो वे जो ऊंचे ओहदों पर बैठे हैं जैसे कोई बड़ा अधिकारी या मंत्री, या फिर दूसरे वे जिसके पास अकूत दौलत है।
लेकिन इन दो से हटकर एक तीसरा भी है जिसको सुनने के लिए प्रशासन को बाध्य होना पड़ता है, और वो है जागरूक नागरिक जो प्रशासन के निष्क्रीय अधिकारियों की कानून के तहत ऐसी खबर ले सकता है जिसकी कल्पना मात्र से ही प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पैर फूल जाते हैं। जागरूक नागरिक कानून के तहत तीन सवाल के माध्यम से ना केवल अपने रुके हुए काम करा सकता है बल्कि प्रशासन के निठल्ले अधिकारियों को जिम्मेवार भी बना सकता है।
सबसे पहले अपनी शिकायत संबंधित विभाग के संबंधित अधिकारी को भेजें। एक महीने तक जवाब का इंतजार करें, फिर अगला कदम बढ़ाएं निम्नलिखित तीन सवाल से।
क्या हैं ये तीन सवाल?
1. मेरे उक्त आवेदन/ शिकायत पर कानूनन एवं नियम के मुताबिक क्या कार्रवाई बनती है, उसकी एक सत्यापित प्रतिलिपि मुझे उपलब्ध कराएं एवं उसके समर्थन में संबंधित कानून एवं नियम की सत्यापित प्रतिलिपि भी मुझे उपलब्ध कराएं।
2. मेरे उपरोक्त आवेदन पर शुरू से लेकर अब तक क्या क्या कार्रवाई हुई है उन सभी कार्रवाई रिपोर्ट की एक सत्यापित प्रतिलिपि मुझे उपलब्ध कराए, एवं ये कार्रवाई कानून एवं नियम के मुताबिक सही हैं इसके समर्थन में संबंधित कानून एवं नियम की सत्यापित प्रतिलिपि भी मुझे उपलब्ध कराएं।
3. अगर मेरे उपरोक्त आवेदन या शिकायत पर आजतक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है, तो कार्रवाई नहीं करने के लिए दर्ज किए गए कारणों की सत्यापित प्रतिलिपि मुझे उपलब्ध कराएं एवं अपने इन कारणों के समर्थन में संबंधित नियम या कानून या शासनादेश या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कोई आदेश, जो भी है उन सबकी सत्यापित प्रतिलिपि मुझे उपलब्ध कराएं।
उपरोक तीन बिंदुओं को लिखते हुए आप किसी भी विभाग के संबंधित पदाधिकारी (जहां या जिनको आपने अपनी शिकायत दी है) से इन तीन बिंदुओं पर निम्नलिखित दो कानून में से किसी भी कानून के तहत जानकारी मांग सकते हैं:
1. सूचना अधिकार अधिनियम 2005
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आप सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 6 के तहत फीस का भुगतान करके संबंधित विभाग के लोक सूचना अधिकारी से उपरोक जानकारी मांग सकते हैं। 30 दिन में जानकारी नहीं मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी को प्रथम अपील, एवं अगले 30 दिन में प्रथम अपील अधिकारी से सूचना नहीं मिलने पर सूचना आयोग को दूसरी अपील दे सकते हैं। फिर भी जानकारी ना मिले तो अपने राज्य के हाई कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226/227 के तहत रिट याचिका दायर कर सकते हैं।
2. भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 75 के तहत संबंधित विभाग के लोक अधिकारी से धारा 74 में वर्णित किसी भी तरह के लोक दस्तावेज की सत्यापित प्रतिलिपी फीस का भुगतान करके मांगी जा सकती है। वांछित समय में दस्तावेज की सत्यापित प्रतिलिपी नहीं मिलने पर अपने जिले के उपभोक्ता आयोग में “सेवा दोष” की शिकायत दे सकते हैं जिसमें आप वांछित दस्तावेज की सत्यापित प्रतिलिपी के अलावा अपने साथ हुए अन्याय एवं मानसिक पीड़ा के लिए समुचित मुआवजा भी मांग सकते हैं। ये मुआवजा उस अधिकारी की सैलरी से काटकर आपको दी जाएगी क्योंकि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण बनाम एम के गुप्ता के केस में इस तरह का प्रावधान बनाया हुआ है।
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तीन सवाल, जो बना सकता है प्रशासन को जिम्मेवार और बदल सकता है आपका लाइफस्टाइल
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