Saturday, 17 October 2026
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विश्व कप हॉकी: भारतीय महिलाओं ने रचा इतिहास

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट में पांचवां स्थान पाने में सफल रही। इससे 52 साल पहले 1974 में यह टीम चौथे स्थान पर रही थी। सवाल केवल पांचवां स्थान पाने का नहीं बल्कि उस हौसले और जीवट का है जो इन खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट में दिखाया। टीम ने पांचवें स्थान के मैच समेत कुल छह मैच खेले जिनमें से केवल एक हारा वह भी दूसरे स्टेज की लीग में। वहां नीदरलैंड्स ने भारत पर 2-0 जीत दर्ज की। और संयुक्त मेजबान नीदरलैंड्स फाइनल में जगह बना चुका है।
भारतीय टीम के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो पूल के पहले मैच में उसने चीन के साथ 2-2 से ड्रॉ खेला फिर दक्षिण अफ्रीका को 6-1 के भारी अंतर से हराया।

यह भारतीय महिला विश्व कप हॉकी इतिहास में भारत की सबसे बड़ी जीत थी। फिर इंग्लैंड के साथ 0-0 कि बराबरी का खेल खेला और अपने पूल में दूसरे स्थान पर रहते हुए अगली स्टेज के लिए क्वालीफाई कर लिया। वहां टीम को पहली हार मिली जब उसे नीदरलैंड्स ने 2-0 हरा दिया। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया को हराना ज़रूरी था। लेकिन कई सुनहरे अवसर मिलने के बावजूद भारत की खिलाड़ी गोल नहीं कर पाईं और मुकाबला 0-0 से ड्रॉ हो गया और टीम सेमीफाइनल से बाहर हो गई।

इस तरह इस स्तर तक भारत ने जो पांच मैच खेले उनमें से एक जीता, एक हारा, और तीन ड्रॉ रहे। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने आठ गोल किए और पांच गोल खाए। फिर पांचवें स्थान के लिए खेले गए मैच में पहले दो क्वार्टर यानी हॉफ टाइम तक 0-0 से बराबर रहने बाद तीसरे क्वार्टर के अंत में इशिका और नवनीत कौर ने एक एक गोल कर टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी इशिका का गोल दर्शनीय था। उसने जर्मनी की 23 मीटर की लाइन के पास से गेंद छीनी और दो जर्मनी रक्षकों को छका कर गोलकीपर के सर के ऊपर से गेंद को गोल में डाल दिया। दूसरा गोल नवनीत कौर ने पेनाल्टी कॉर्नर पर सीधी हिट से बनाया। तीसरा गोल, दूसरे हाफ के शुरू में ही नवनीत ने दाएं छोर से बने हमले में किया। यहां भी नवनीत की हॉकी स्किल देखने लायक थी। इस तरह भारत ने टूर्नामेंट में कुल 11 गोल किए और छह गोल खाए।

इन मुकाबलों में भारत की तरफ से सबसे अधिक चार गोल नवनीत कौर ने किए। दीपिका दो गोल करने में सफल रही। सुनीलिता, सुशीला चानू, लालरिमसयानी, साक्षी राणा, और इशिका ने एक एक गोल किया।

कुल मिला कर भारत की रक्षा पंक्ति बड़ी मजबूत रही। खास कर गोलकीपर सविता और बिच्छू देवी दोनों ने बहुत अच्छे बचाव किए। भारत के अधिकांश हमले दये छोर से बने। अभी टीम में कुछ कमज़ोरियां भी नज़र आईं। लेफ्ट साइड से हमलों में धर नहीं थी। जवाबी हमलों में हैरान कर देने वाले एलिमेंट की कमी थी। विरोधियों की डी में झिझक साफ दिखी, नहीं तो भारत ऑस्ट्रेलिया को ही हरा लेता। उन्हें ऑस्ट्रेलिया के गोल मुख में ढीली गेंद मिली लेकिन नवनीत और टेटे दोनों ही सोचती रह गईं कि हिट कौन मारेगा। इतने में ऑस्ट्रेलियाई रक्षक गेंद निकल ले गए। इसी तरह पैनल्टी कॉर्न्स में नवनीत कौर स्कूप नहीं करती। इस कारण विरोधी गोलकीपर नीचे लेट कर गोल आसानी से बचा लेती थी। नियमों के अनुसार अगर गोल पर पहली हिट से गेंद लकड़ी के फट्टे से ऊपर टकराती है तो गोल नहीं माना जाता। स्कूप से आप कहीं भी गेंद को गोल में डाल कर गोल कर सकते हैं।

अब एशियाड सर पर है तो टीम में कोई बड़ा बदलाव समझदारी नहीं होगी। उम्मीद करनी चाहिए कि यह टीम एशियाड में गोल्ड मेडल जीत कर अगले ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई कर जाएगी। पर यहां चीन, जापान और कोरिया की चुनौती काफी मज़बूत होगी।

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