Tuesday, 22 September 2026
Breaking News
उत्तम संयम धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने मनाई सुगंध दशमी संस्कृत भाषा में राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त, विद्वान पंडित साधू राम शास्त्री की पुण्यतिथि पर बुजुर्ग शिष्यों ने अपने प्राचार्य को किया नमन अब 1.80 लाख आय वाले परिवारों को भी मिलेगा लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ: मुख्यमंत्री आयुष विभाग ने गांव चक बजीदा (टाहली वाला) में आयोजित किया चिकित्सा शिविर  उत्तम सत्य धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने मनाया दशलक्षण पर्व का पांचवां दिन  भारत-पाक सीमा पर अब रिट्रीट सैरेमनी सांय 5.30 बजे   उत्तम शौच धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने मनाया पुष्पदंत भगवान का निर्वाण दिवस श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में धूमधाम से मनाई गई राधाष्टमी, राधा रानी का पंचामृत से महाभिषेक किया गया नशे के अड्डे कालोनियों के साथ-साथ शहर के पॉश इलाकों में भी हैं : तरसेम मित्तल जब सरकार गैंगस्टरों को जेलों से लाकर हलका इंचार्ज बनाएगी, तो नशा माफिया का बेलगाम होना तय है : सुनील जाखड़
पंजाब Trending

मोटे अनाज की पैदावार शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए ज़रूरी

Read in:Hindi

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
फूडज़ एंड ड्रग ऐडमनिस्टरेशन पंजाब की तरफ से ज़िला प्रशासन के सहयोग से कंपनी बाग़ में करवाए गए इट राइट मिलेट का उद्घाटन करते हुये स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. इन्दरबीर सिंह निज्जर ने समागम में उपस्थित किसानों, ख़ाद्य माहिरों, विद्यार्थियों और आम लोगों के इक्ट्ठ को संबोधन करते हुये मूल अनाज की पैदावार करने के ज़ोर दिया।
डॉ. निज्जर ने संबोधन करते हुये कहा कि अपनी धरती को ज़हर से बचाने के लिए हमें कुदरती खेती करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मोटा अनाज जिसमें मुख्य तौर पर बाजरा, ज्वार, कोदरा, कुट्टकी, सांवां, और रागी आते हैं, को बिल्कुल ही हम भूल गए हैं, जबकि हमारी शारीरिक और मानसिक तंदरुस्ती के लिए इनका सेवन बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज की पैदावार करने से जहाँ पानी की बचत होती है वहीं दवाएँ भी कम इस्तेमाल करनी पड़तीं हैं। जिससे हमारी मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है। डॉ. निज्जर ने कहा कि पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज के लाभ के बारे जागरूकता लहर चलाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार भी इनकी मदद करेगी।
डॉ. निज्जर ने कहा कि किसी समय मोटा अनाज हमारी ख़ुराक का अहम हिस्सा होता था। परन्तु हमारे रहन-सहन में आए बड़े बदलाव के कारण यह हमारी थाली में से गायब हो गया है। उसका खामियाजा हम कई भयानक बीमारियों के साथ भुगत रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमें ज़रूरत है कि मोटे अनाज को फिर अपनी हमारी थाली का हिस्सा बनाऐं और बीमारियों से बचें। उन्होंने कहा कि हमने गेहूँ और धान का ज़्यादा प्रयोग करके ख़ुद बीमारियों को न्योता दिया है और हमें फिर अपना मूल अनाज की तरफ मुड़ना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि गेहूँ में गलूटन की ज़्यादा मात्रा होने के कारण हम बीमार हो रहे हैं और कैमिकलों का प्रयोग करके अपनी मिट्टी भी ख़राब कर रहे हैं।