Saturday, 11 July 2026
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नेता, बाबा और बलात्कार

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व्यंग्य :

मनमोहन सिंह

आज के हालत को देखें तो नेता, बाबा और बलात्कार में एक भाईचारा नज़र आता है। बलात्कार कोई जुर्म नहीं एक नेता और बाबा के लिए एक स्वाभाविक क्रिया लगती है। इसी कारण एक नेता को दोषी पाए जाने के और सज़ा घोषित कर दिए जाने के बाद भी 'देश हित' में ज़मानत दे दी गई। सज़ा निरस्त कर दी गई। पर बुरा हो लोगों का पहुंच गए सर्वोच्च अदालत में और बेचारे नेता जी की देश सेवा की तमन्ना पर कुठाराघात करते हुए उनकी ज़मानत रद्द करवा दी। लोगों ने यह नहीं सोचा कि अब देश कैसे चलेगा?

ठीक है उनसे अनजाने में बलात्कार हो गया, यह भी न होता अगर महिला इनकार न करती। अब कसूर तो महिला का है। वो राजनेता हैं उन्हें सौ काम और भी हैं, इस छोटी से गलती के लिए उन्हें देश सेवा से दूर तो नहीं किया जाना चाहिए। वो बेचारे देश की सेवा करना नहीं छोड़ सकते। जेल में रह कर तो देश सेवा नहीं हो सकती। इसी बात को ध्यान में रख कर हाई कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे थी। पर लोग कहां माने।

पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट और बेचारे की ज़मानत रद्द करवादी। एक नेता देश और समाज की सेवा से वंचित हो गया। वैसे तो ये नेता बलात्कार जैसे मामलों में जेल काट कर या सज़ा बीच में ही रद्द होने पर जब बाहर आते हैं तो उनके देशभक्त समर्थक फूल मालाओं से जेल के गेट पर उनका ऐसे स्वागत करते हैं जैसे आज़ादी की लड़ाई के परवानों का हुआ करता था। नारेबाजी होती है जैसे कह रहे हों- “तुम बलात्कार पे बलात्कार करो हम तुम्हारे साथ हैं”।

इन 'महापुरुषों' के बिना देश का कल्याण नहीं हो सकता, तभी जब भी चुनाव आते हैं तो एक बाबा जो बलात्कार और हत्या के मामले में उम्र कैद काट रहे हैं, को लंबी पैरोल पर बाहर भेजा जाता है। आखिर देश भी तो चलाना है।

इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे बाबाओं और राज नेताओं को कानूनी रूप से एक दो बलात्कार और एक दो खून करने की इजाज़त दे देनी चाहिए। इससे ये लोग निडर हो कर काम कर पाएंगे वैसे भी अपराधी होना, बलात्कारी होना, खूनी होना आम लोगों की नज़रों में कोई बड़ी बात नहीं। क्योंकि ये बाबा लोग जेलें काट रहे हैं पर बाहर इनके चेलों की गिनती में कोई कमी नहीं आ रही।

महिलाएं इनके नामों की तख्तियां और फोटो उठा सड़कों पर इनका स्तुति गान करते देखी जा सकती हैं। नेता, नौकरशाह इनके दरबारों में सर झुकाते आम दिखते हैं। ऐसे महापुरुषों को बलात्कार और हत्या के मामलों में छूट तो मिलनी चाहिए। इन्हें आम बलात्कारी की श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।