Tuesday, 14 April 2026
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बीजेपी का बिहार बंद, कितना सफल, कितना असफल ?

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संजय कुमार मिश्रा

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का सियासी माहौल गरम है। अभी तक विपक्ष SIR मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रही थी लेकिन इसी बीच कांग्रेस की एक सभा में पीएम मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी से माहौल गरमा गया है। पीएम मोदी ने अपने भावुक भाषण में इसे सिर्फ अपनी मां का ही नहीं बल्कि सभी माताओं का अपमान बताया। अब इसे मुद्दे को लेकर एनडीए ने आज 4 सितंबर को 'बिहार बंद' बुलाया था।

हालांकि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का कहना है कि पीएम मोदी के मां को कथित अपशब्द कहने वाले उनके पार्टी के कार्यकर्ता नहीं हैं, जिसने भी ऐसा किया है गलत किया है उसे सजा दिया जाए, लेकिन बीजेपी को तो विपक्ष के साथ राजनीति करनी है वो कहां सुनने वाले, बस मोदी जी के मां के अपमान का बदला लेने के लिए कर दिया बिहार बंद का ऐलान।

बिहार बंद का एक पहलू

पटना जिले के मनेर और बिहटा में भाजपा नेताओं ने बिहार बंदी को लेकर सड़क जाम कर दिया । मनेर में भाजपा नेता व पूर्व विधायक श्रीकांत निराला के नेतृत्व में बिहार बंदी की सफलता को लेकर सड़क जाम किया गया। इस दौरान सबसे पहले भाजपा नेताओं और पूर्व विधायक में मनेर नगर का भ्रमण करते हुए लोगों के दुकानों को बंद करने की अपील की। उसके बाद मार्च करते हुए मनेर के भगत सिंह स्मारक मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 30 को जामकर महागठबंधन के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि मां को गाली देना देश कतई बर्दाश्त नही करेगा।

अररिया: सड़क पर उतरे बीजेपी सांसद प्रदीप कुमार, दुकानों को कराया बंद ।

गोपालगंज: बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का पुतला फूंका।

कटिहार में सड़कों पर उतरे नेता-कार्यकर्ता

कटिहार में एनडीए के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग चौक-चौराहों पर प्रदर्शन करते हुए महागठबंधन की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आम जनजीवन भी आंशिक रूप से प्रभावित दिखा। सभी बाजार बंद रहे तो सड़कों पर आवागमन भी बाधित हुआ।

दरभंगा की सभा में उसके विरोध में बिहार बंद बुलाया गया है। सुबह से ही पटना की सड़कों पर भाजपा के कार्यकर्ता बंद को सफल करने में जुटे हुए हैं। आयकर गोलंबर पर महिला मोर्चा के कार्यकर्ता और बीजेपी के युवा मोर्चा के कार्यकर्ता पहुंचे हैं गाड़ियों को रोका है और बिहार बंद के लिए नारेबाजी करते दिखे।

एनडीए का बिहार बंद: #जमुई में कचहरी को जाम करके एनडीए गठबंधन के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। 'मां का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान' का नारा लगा रहे हैं।

उपरोक्त खबरों से एक बात तो साफ दिख रहा है कि बीजेपी के इस बंद को बिहार की जनता का पूरा समर्थन नहीं मिल पाया तभी तो बीजेपी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को अपनी गुंडई दिखाते हुए जबरदस्ती बंद करवाना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर चल रहे खबरों के अनुसार, जहानाबाद में एक महिला शिक्षक को स्कूल जाने से बीजेपी कार्यकर्ता जबरदस्ती रोक रहे थे। बच्चों से भरी स्कूल बस को भी रोका गया, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाते हुए एम्बुलेंस को भी नहीं जाने दिया गया।

(SUBHEAD)कुल मिलाकर एनडीए ने जहां इस बंद को पूरी तरह से सफल बताया तो विपक्ष ने इस बंद को फ्लॉप बताया है। 

बिहार बंद का दूसरा पहलू 

बीजेपी के इस बिहार बंद को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल भी घूम रहे हैं, लोग कह रहे हैं, मोदी जी के माता को सम्मान और बिहार के माताओं का अपमान।

लोक गायिका नेहा सिंह राठौर पूछती हैं, कोई मोदी जी के मां के बारे में कुछ कहे तो बवाल, लेकिन जब दूसरों के मां को जरसी गाय और 400 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहे तो ठहाके ??

वो आगे कहती हैं, जब मणिपुर में माताओं एवं बहनों को नंगा करके घुमाया जा रहा था तब तो मोदी जी के आंसू नहीं निकले थे, अभी बिहार चुनाव सिर पर है तो मां के नाम का घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, ताकि लोगों को असल मुद्दे (जैसे महंगाई बेरोजगारी आदि) से ध्यान भटकाकर सहानुभूति के वोट ले सके ।

राजद के जिलाध्यक्ष सुनील राय कहते हैं, कि यह तो साफ़ हो गया कि भाजपा के पास अब जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं बचा है, नरेंद्र मोदी की मां को गाली देने के सवाल पर सिर्फ बिहार बंद क्यों पूरा देश बंद होना चाहिए था , जिसने भी गाली दी है उसे सजा भी मिलनी चाहिए, लेकिन जब मोदी जी अपने भाषणों में दूसरों को गालियां व कांग्रेस को विधवा, 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड व राहुल जी को हाइब्रिड बछड़ा बोलते हैं, तब किसी मां का अपमान नहीं दिखता है, तब कोई बिहार बंद या भारत बंद नहीं होता है। बीजेपी के इस राजनीति को बिहार के लोग अच्छी तरह से जान चुके हैं।जब बीजेपी के प्रवक्ता नेशनल टीवी पर बैठकर मां बहन को गालियां देते हैं और जिनके डिप्टी सीएम एक नेता को इतनी गालियां देकर बिहार में फेमस हो जाते हैं, तब बीजेपी को किसी मां का अपमान नहीं दिखता है, तब कोई बिहार बंद या भारत बंद नहीं होता । बिहार बंदी पूरी तरह फ्लॉप रही है सही मायनी में ये नेताओं की बंदी साबित हुई है, जनता की बंदी नहीं ।

उपरोक्त दोनों पहलुओं को देखने के बाद ये तो बिहार के जनता को सोचना है कि वो असल मायनों में वर्तमान की राजनीति को पहचाने एवं आगामी चुनाव में सही फैसला ले।