विद्या भारती के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘नमामि भारतम्’ के अंतर्गत एक करोड़ कंठों में गूँजा राष्ट्र स्वर
चंडीगढ़: भारत के महान कवि एवं उपन्यासकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित अमर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान ‘नमामि भारतम्’ के अंतर्गत शारदा सर्वहितकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सैक्टर 40-डी, चंडीगढ़ में शुक्रवार को प्रातः 11:00 बजे सामूहिक वंदे मातरम् गायन का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रेम सिंह खिमटा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं गणमान्य अतिथियों ने अनुशासित एवं पंक्तिबद्ध होकर सम्पूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया तथा राष्ट्रभक्ति का अनुपम संदेश दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा एवं अधिवक्ता श्रीमती शिप्रा बंसल, पंजाब विश्वविद्यालय के गणित विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार तोमर तथा श्री नरेश जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, तिलक एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके पश्चात शंखनाद के साथ ठीक प्रातः 11:00 बजे उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में वंदे मातरम् का गायन किया।
विद्या भारती के इस राष्ट्रव्यापी अभियान में देशभर के लगभग 25,000 विद्यालयों एवं विभिन्न संस्थानों की सहभागिता रही। लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा नागरिकों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन कर राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव एवं मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की। अनुमान है कि एक करोड़ से अधिक कंठों ने एक साथ राष्ट्रगीत का राष्ट्रभक्ति के साथ गायन किया। जिसके द्वारा राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया गया
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि ‘नमामि भारतम्’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणाओं, भारतीय संस्कृति के गौरव तथा राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त अभियान है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना का विकास करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस विराट सामूहिक वंदे मातरम् गायन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने हेतु इसके रिकॉर्ड प्रमाणीकरण की प्रक्रिया भी संचालित की जा रही है। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरण की एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में स्थापित हो सके।
चंडीगढ़
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