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कविताएँ
सफ़ीना है जो साहिल पे उसे मझधार होने दो
Read in:Hindiग़ज़ल सफ़ीना है जो साहिल पे उसे मझधार होने दोउसे तूफान से अब तो यहां दो चार होने दो…
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