डेराबस्सी, कृत्रिका:
कुछ दिन पहले डेराबस्सी के पास सुंड़रा गांव में एकम्स लाइफ साइंस फैक्ट्री से रासायनिक अपशिष्ट जल छोड़े जाने का मामला सामने आया था। जिस पर प्रदूषण विभाग ने कार्रवाई करते हुए उक्त फैक्ट्री में छापेमारी भी की, लेकिन मौके पर उनके सामने गंदा केमिकल वाला पानी जैसा कुछ नहीं आया, बल्कि उन्होंने फैक्ट्री के गंदे पानी के सैंपल भी लिए। लेकिन ग्रामीणों ने प्रदूषण विभाग की टीम पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 26 दिसंबर को आसपास के खेतों में रासायनिक अपशिष्ट जल के खुले में डंपिंग के कारण प्रदूषण विभाग के मोहाली कार्यालय में उक्त फैक्ट्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने प्रदूषण विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदूषण विभाग के एसडीओ और एक्सियन ने 28 दिसंबर को जब फैक्ट्री में औचक छापेमारी की तो उन्होंने शिकायत करने वाले किसी भी ग्रामीण व्यक्ति को मौके पर नही बुलाया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने उनके सामने रसायनयुक्त गंदे पानी के नमूने तक नहीं लिए। उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर को ग्रामीणों द्वारा मौके पर पकड़े गए गंदे केमिकल टैंकर के मामले में प्रदूषण विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की और फैक्ट्री प्रबंधकों को बचाने के लिए प्रदूषण विभाग ने फैक्ट्री के सीसीटीवी फुटेज कब्जे में नहीं लिए और उनके द्वारा 23 दिसंबर को ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए रसायन युक्त गंदे पानी वाले टैंकर को मौके से भागने में भी फैक्ट्री मालिकों की मदद की। इस बात से यह साबित होता है कि प्रदूषण विभाग की जिस टीम ने 28 दिसम्बर को फैक्ट्री में जांच पड़ताल की थी वो भी फैक्ट्री प्रबंधन के साथ मिलीभुगत है। जिससे प्रदूषण विभाग की टीम द्वारा की गई कार्रवाई पर सावलिया निशान उठ रहे हैं। गौरतलब है कि उक्त फैक्ट्री पर कुछ समय पहले रसायन युक्त गंदे पानी को खुला छोड़ने के आरोप में प्रदूषण विभाग द्वारा दो लाख का जुर्माना भी लगाया गया था। ग्रामीणों ने कहा कि प्रदूषण विभाग मोहाली के एसडीओ शर्मा द्वारा की गई कार्रवाई हमेशा शक के घेरे में होती है जिस कारण प्रदूषण विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने एसडीओ पर फैक्ट्री प्रबंधन से मिलीभगत करने का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ आदर्शपाल विज से भी कर चुके हैं। उन्होंने चेयरमैन से मांग की है कि उक्त फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी फुटेज (17 दिसंबर से 23 दिसंबर) को कब्जे में लिया जाए और फैक्ट्री में केमिकल युक्त गंदे पानी के सैंपल ग्रामीणों की हाज़री में लिए जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और फैक्ट्री से आखिरी समय तक डेराबस्सी इलाके में प्रदूषण फैलाने का राज खुल सके।
क्या कहते हैं एसडीओ प्रदूषण विभाग:
इस बारे में जब प्रदूषण नियंत्रण विभाग मोहाली के एसडीओ रंतेज शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी टीम जो भी छापेमारी करती है वो बिना बताए कभी भी कर सकती है। उन्होंने बताया कि विभाग ने उक्त फैक्ट्री पर छापा मारने के लिए एससी, एसडीओ व एक्सियन की टीम गठित की थी। उन्होंने छापेमारी के दौरान सैंपल इकट्ठे किये हैं उनकी रिपोर्ट बनाकर अपने उच्च अधिकारियों को भेज दी है।
जब चेयरमैन प्रदूषण बोर्ड डॉ आदर्शपाल विज से बात की तो उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को मौके पर इसलिए नहीं बुलाया जाता है क्योंकि उक्त जगह पर माहौल खराब होने का डर रहता है। उन्होंने कहा कि उन्हें ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायत मिली है। जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी की मिलीभगत व लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।