Thursday, 23 July 2026
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ठंड से बचने के लिए कमरे में रखी अंगिठी बनी काल का ग्रास

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अबोहर, (दलीप)
कमरे में जलाई जाने वाली भट्ठी अकसर ही लोगों की मौत कारण बनती है, लेकिन इसके बावजूद लोग जागरूक नहीं है और इसे अपने कमरे में जलाकर सो जाते हैं। नतीजा यही होता है कि दम घुटने के कारण व्यक्ति की मौत हो जाती है। वीरवार की रात भी सीतो रोड़ पर कुछ ऐसा हुआ। सीतो रोड़ पर स्थित वर्कशाप में बने कमरे में सो रहे एक कर्मचारी की जलाई भट्‌ठी की गैस चढ़ने से मौत हो गई, जबकि एक साथी को उपचार के लिए श्रीगंगानगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी रूम में रखवाया गया है। पुलिस मामले की जानकारी दे दी गई है। जानकारी अनुसार सहारनपुर के यूपी निवासी उसमान पुत्र सुलेमान वासी सीतो रोड़ पर स्थित एक वर्कशाप पर वैल्डिंग का कार्य करता था और वहीं पर बने कमरे में सो जाता था। गत रात्रि ठंड अधिक होने के कारण उसमान व उसका दोस्त सदाब पुत्र लाला कमरे के अंदर लकड़ियां जलाकर सो गए। दूसरे कमरे में सो रहे उसमान के भाई सुफियान ने बताया कि शुक्रवार करीब साढ़े 8 बजे जब उसने देखा कि उसका भाई व दोस्त अभी तक उठे नहीं है, तो उसने कमरे का दरवाजा खोला। तो उसने देखा कि दोनों बेसुध पड़े हैं। जब उसने उन्हें उठाने की कोशिश की, तो पता चला कि उसमान की तो मौत हो चुकी है, जबकि सदाब की सांसे चल रही थी। उसने बताया कि लकड़िया जलाने के कारण पैदा हुई गैस के चलते ही उनकी मौत हुई है। सदाब को श्रीगंगानगर के अंबे अस्पताल में दाखिल करवाया गया है उसमान की मौत से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। इधर, समाजसेवी व श्री बाला जी मानव सेवा समिति के मुख्य सेवादार रजत लूथरा ने कहा कि जागरूकता के अभाव में ऐसी घटनाएं हो रही है, इसलिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। कभी भी कमरा बंद करके अंदर आग न जलाए, क्योंकि अगर आप कमरा बंद करके भट्‌ठी जलाते हैँ, तो निश्चित तौर पर गैस बनने से व्यक्ति का दम घुटेगा, इसलिए सर्वप्रथम इन बातों का ध्यान रखें और कभी भी ऐसा न करें, अगर लकड़ी जलाने की जरूरत पड़ भी गई है, तो वहां वैंटीलेशन का खास ध्यान रखें, गौरतलब है कि इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लोग जागरूक नहीं है।