Thursday, 14 May 2026
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शिव रात्रि के यथार्थ अर्थ व परमात्मा शिव की सत्य पहचान के सन्देश से श्रद्धालुओं को अवगत कराया

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चण्डीगढ़, फेस2न्यूज:
मनीमाजरा स्थित प्रजा पिता ईश्वरीय विश्व विद्यालय ब्रह्माकुमारीज में शिव जयंती का पर्व अर्थ सहित बहुत धूमधाम से मनाया गया जिसमें सेक्टर 21 इंचार्ज राजयोगिनी बी के मुकेश दीदी और मनीमाजरा सेण्टर इंचार्ज बी के शीना दीदी दोनों की उपस्थिति में परमात्मा शिव के अवतरण का सन्देश सबको सुनाया गया।
इस अवसर पर बताया कि विश्व की सभी महान विभूतियों के जन्मोत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन परमात्मा शिव की जयंती को जन्मदिन न कहकर शिवरात्रि कहा जाता है, आखिर क्यों? इसका अर्थ है परमात्मा जन्म-मरण से न्यारे हैं। परमपिता शिव अजन्मा हैं, अभोक्ता, ज्ञान के सागर हैं, आनंद के सागर हैं, प्रेम के सागर हैं, सुख के सागर हैं। उनका स्वरूप ज्योतिर्बिन्दु है। परमात्मा शिव परमधाम के निवासी है। शिव का अर्थ ही है ‘कल्याणकारी।’ परमात्मा शरीरधारी नहीं है। इसका मतलब ये नहीं कि उनका कोई आकार नहीं बल्कि स्थूल आंखों से न दिखने वाला सूक्ष्म ज्योति स्वरूप है। परमात्मा शिव को सभी ग्रंथों, पुराणों और वेदों में भी सर्वोपरि ईश्वर माना गया है।