पी.आर 7 सड़क पर पर्ल ग्रुप की जमीनों पर बिल्डरों ने कब्जे कर किए अवैध निर्माण: सुखदेव चौधरी
(MOREPIC1) जे.एस. कलेर/ जीरकपुर
अमरूद बाग घोटाले और दागी तहसीलदारों के एक गुप्त पत्र के बाद, एक और घोटाले ने राजस्व विभाग को परेशान कर रखा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद, निर्मल सिंह भंगू के पर्ल्स ग्रुप की संपत्तियां बेच दी गई थीं या उनपर अवैध तौर पर निर्माण कर लिया गया.
यह आरोप रेजिडेंट वैलफेयर एसोसिएशन जॉइन्ट एक्शन कमेटी के प्रधान व समाजसेवी सुखदेव चौधरी ने लगाया है। उन्होंने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो द्वारा आदेशों के बावजूद ऐसी संपत्तियों को 'धोखाधड़ी से बेचने में सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
चौधरी ने कहा कि माल विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से जीरकपुर की पी.आर 7 सड़क पर पर्ल ग्रुप की जमीनों पर बिल्डरों ने कब्जे कर किए अवैध निर्माण कर लिए गए हैं लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेशों के बावजूद पर्ल्स ग्रुप की अवैध रूप से बेची गई संपत्तियों के जांच के मामलें में माल विभाग के अधिकारियों ने संबधित जमीनों की रोकार्ड में रैड एंट्री तक नहीं की है।
(SUBHEAD)चौधरी ने कहा कि 25 जुलाई 2016 को एक आदेश में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड को उसकी संपत्ति बेचने से रोक दिया था।धोखाधड़ी कुछ महीने पहले तब सामने आई थी जब विजिलेंस ब्यूरो ने वित्तीय आयुक्त, राजस्व से सभी डीसी को पंजाब में पीएसीएल/पीजीएफ लिमिटेड के भूमि राजस्व रिकॉर्ड में की गई प्रविष्टियों के सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। जिसके बाद पीएसीएल/पीजीएफ लिमिटेड की बेची गई संपत्तियों की एक सूची विजिलेंस ब्यूरो के साथ साझा की गई थी।
विजिलेंस ब्यौरों द्वारा ऐसी संपत्तियों की अवैध बिक्री में माल विभाग के अधिकारियों की भूमिका की पहचान करने और लेनदेन की जांच जी जा रही है। चौधरी ने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो ने संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने में अधिकारियों की भूमिका और आपराधिक देनदारियों की जांच के लिए डीसी से कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है।
विजिलेंस ब्यूरो ने यह भी अनुरोध किया है कि सभी डीसी को धोखाधड़ी से या अदालत के आदेशों के उल्लंघन में निष्पादित बिक्री/हस्तांतरण कार्यों के परिणामस्वरूप अनुमोदित उत्परिवर्तन को रद्द करके पहले से ही बेची गई संपत्तियों के शीर्षक को बहाल करने के लिए कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिए जाए जिसके बावजूद पर्ल्स ग्रुप की अवैध रूप से बेची गई संपत्तियों के जांच के मामलें में माल विभाग के अधिकारियों ने संबधित जमीनों की अपने रिकार्ड में रैड एंट्री नहीं कि ताकि पी.आर 7 सड़क पर पर्ल ग्रुप की जमीनों को अवैध रूप से एक्स पार्टी तकसीम करवाकर प्रोजेक्ट बनाकर बैठे बिल्डरों को लाभ पहुचाया जा सके। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा डीसी को यह भी कहा गया है कि जहां संपत्तियां बेची नहीं गई हैं, लेकिन अनधिकृत कब्जे में हैं, वे ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाने के लिए कदम उठाएं।
पहचानी गई संपत्तियों की एक सूची भी यह सत्यापित करने के लिए साझा की गई है कि क्या राजस्व रिकॉर्ड में संपत्तियों पर लोन न होने के संबंध में प्रविष्टियां की गई हैं। विजिलेंस ने डीसी को अपने जिले में भूमि राजस्व रिकॉर्ड की जांच करने और 1998 के बाद से ऐसे किसी भी भूमि लेनदेन की पहचान करने के लिए कहा है, जिसके तहत पीएसीएल/पीजीएफ लिमिटेड की किसी भी संपत्ति का स्वामित्व पूरी तरह या आंशिक रूप से स्थानांतरित किया गया था-
जीरकपुर की पी.आर 7 सड़क सैकड़ो लोगों और बिल्डरों ने उक्त जमीनो पर कब्जा कर प्रोजेक्ट तक बना डाले जबकि फरवरी 2016 में एक पूर्व आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली समिति के तहत पीएसीएल लिमिटेड की संपत्तियों की बिक्री और किसी भी प्रकार के कब्जे को हटाने के निर्देश दिए थे।