Tuesday, 29 September 2026
Breaking News
राजस्थान परिवार ट्राइसिटी की ‘चाय पर चर्चा’ में समाज की समस्याओं और भागीदारी पर मंथन 20वें एशियाई खेलों कें पदक विजेताओं को दी जाएगी 5.33 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशिः मुख्यमंत्री गोल्ड मेडल विजेता सुरुचि को मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने फ़ोन पर दी बधाई, -डीसी वर्षा खांगवाल ने किया सम्मानित ढकोली में ओआरसी सैनिक अकादमी ने चलाया पौधारोपण अभियान प्रॉपर्टी फेडरेशन, चण्डीगढ़ को मिला नया नेतृत्व : नरेश बंसल अध्यक्ष निर्वाचित *नमो मैराथन में फरीदाबाद की धरती से नशे के खिलाफ आज हरियाणा की बुलंद आवाज उठी है : मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी टैगोर थिएटर में बिखरे बॉलीवुड मेलोडीज़ के रंग: 'सुरीला सफ़र-30' में गूंजी लता जी की यादें पंजाब सरकार नौकरियों पर श्वेत पत्र जारी कर बताए पांच साल में कितने युवाओं को रोजगार दिया : मुख्यमंत्री नायब सैनी सभी राज्यों को 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाने के लिए परामर्श दशलक्षण पर्व के दसवें दिन उत्तम त्याग धर्म की हुई आराधना
राष्ट्रीय Trending

वकील के खिलाफ भी “सेवा में कमी” की उपभोक्ता आयोग में हो सकती है शिकायत

Read in:Hindi

संजय मिश्रा

वकील अगर फ़ीस लेकर भी केस की पैरवी अदालत में ना करे तो उसके खिलाफ भी “सेवा में कमी की शिकायत उपभोक्ता आयोग में की जा सकती है, लेकिन योग्यता के आधार पर केस हार जाना वकील के सेवा में कमी नहीं है .

नंदलाल लोहरिया बनाम जगदीश चंद्र पुरोहित एलएन 2021 एससी 636, केस नंबर और तारीख: एसएलपी (डायरी) 24842 ऑफ 2021 निर्णय दिनांक 8 नवंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा :-

(SUBHEAD)“हर मुकदमे में किसी भी पक्ष को हारना तय है और ऐसी स्थिति में जो पक्ष मुकदमे में हारेगा, वह सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए मुआवजे के लिए उपभोक्ता मंच से संपर्क कर सकता है, जो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के एक आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ऐसी शिकायतें केवल उस मामले में हो सकती हैं, जहां यह पाया जाता है कि वकील द्वारा सेवा में कोई कमी थी।

मामले में नंदलाल लोहारिया ने बीएसएनएल के खिलाफ अपने तीन अधिवक्ताओं के माध्यम से जिला फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। उसके तीनों शिकायतों को गुण-दोष के आधार पर जिला आयोग ने खारिज कर दिया। केस खारिज होने के बाद लोहरिया ने इन तीनों अधिवक्ताओं के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपने मामलों को लड़ने में सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई और 15 लाख रुपये के मुआवजे का दावा किया।

जिला आयोग ने इस शिकायत को खारिज कर दिया और बाद में राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने भी इस आदेश को बरकरार रखा।

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीएसएनएल के खिलाफ शिकायतों को गुणदोष के आधार पर खारिज कर दिया गया और वकीलों की ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई, अधिवक्ता शिकायतकर्ता की ओर से आयोग में पेश हुए लेकिन केस की योग्यता के आधार पर हार गए।

कोर्ट ने कहा, “4.1 एक बार जब यह पाया गया कि अधिवक्ताओं की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं थी तो याचिकाकर्ता की शिकायत को खारिज किया जा सकता है। जिला फोरम ने उचित ही खारिज किया। राज्य आयोग और उसके बाद राष्ट्रीय आयोग ने उसकी पुष्टि की।

केवल उस मामले में जहां यह पाया जाता है कि अधिवक्ता ने सेवा में कोई कमी की है, वहां कुछ मामला हो सकता है। उन सभी मामलों में जहां वादी योग्यता के आधार पर हार गया और अधिवक्ता/ओं की ओर से कोई लापरवाही नहीं थी, यह नहीं कहा जा सकता है कि अधिवक्ता ने सेवा में कोई कमी की।

यदि याचिकाकर्ता की ओर से दिया गया निवेदन स्वीकार कर लिया जाता है तो प्रत्येक मामले में जहां वादी गुण दोष के आधार पर हार गया है और उसका मामला खारिज कर दिया गया है, वह उपभोक्ता मंच से संपर्क करेगा और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए मुआवजे के लिए प्रार्थना करेगा। अधिवक्ता के तर्क के बाद गुण-दोष के आधार पर केस हारने के मामले को अधिवक्ता की ओर से सेवा में कमी नहीं कहा जा सकता है।”

कोर्ट ने इस प्रकार इस विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।