Wednesday, 22 April 2026
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ड्राइविंग लाइसेंस में देरी, परिवहन अधिकारी पर उपभोक्ता आयोग का जुर्माना

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चंडीगढ, संजय कुमार मिश्रा:
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में देरी को सेवा में कमी मानते हुए जिला उपभोक्ता आयोग लुधियाना ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी लुधियाना पर 5 हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने शिकायत संख्या 485 ऑफ़ 2022 का निपटारा करते हुए 20 दिसंबर 2023 को अपने आदेश में कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में देरी इनके सेवा में कमी है इसलिए सेवा प्रदाता आवेदक को 5 हजार रूपये के मुआवजे का भुगतान करे।
मामले अनुसार लुधियाना निवासी जोधा सिंह ने 15 अगस्त 2022 को क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के कार्यालय में अपने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया। लेकिन इसको जनवरी 2023 में लाइसेंस प्राप्त हुआ। इस बीच उसने परिवहन कार्यालय के कई चक्कर लगाए लेकिन कोई समुचित जवाब नहीं मिला, लाइसेंस नहीं होने के कारण वो गाड़ी चलाने में असमर्थ थे और इस कारण उसे काम नहीं कर सकने के कारण काफी आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ा।  (SUBHEAD)
नोटिस जारी होने पर परिवहन कार्यालय लुधियाना से एक क्लर्क उपस्थित हुआ और अपना जवाब दाखिल किया। लुधियाना परिवहन कार्यालय ने अपने जवाब में कहा कि- आवेदक का आवेदन कमर्शियल लाइसेंस के लिए था जिसके लिए उसे ड्राइविंग टेस्ट से गुजरना था, पंजाब विजिलेंस द्वारा ड्राइविंग टेस्ट इंस्पेक्टर को रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था जिस कारण आवेदक के ड्राइविंग टेस्ट में देरी हुई जिस कारण लाइसेंस देरी से जारी हुआ।
आवेदक की तरफ से बहस करते हुए अधिवक्ता अजय शर्मा ने आयोग को बताया कि पंजाब ट्रांसपेरेंसी एंड अकॉउंटिबिलिटी इन डिलीवरी ऑफ़ पब्लिक सर्विसेज एक्ट 2018 के तहत सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन 2019 में सेवाओं की लिस्ट में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए 7 दिन की समय सीमा तय की गई है और वर्तमान केस में अत्यधिक देरी से इस कानून एवं इसके प्रावधानों का भी उल्लंघन हुआ है।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने कहा कि आवेदक ने जब कानून के तहत फ़ीस जमा करके ड्राइविंग लाइसेंस की सेवा लेना चाहा तो वो कानूनन एक उपभोक्ता है और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने वाला अधिकारी एक सेवा प्रदाता है। सेवा में कमी की वजह से अगर उपभोक्ता को कोई आर्थिक हानि या मानसिक परेशानी होती है तो उपभोक्ता मुआवजे का हकदार है। आयोग ने कहा कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अपनी नाकामी को छुपाने के लिए ड्राइविंग टेस्ट लेने वाले इंस्पेक्टर के गिरफ्तारी का बहाना करके अपने जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
आयोग ने कहा कि इंस्पेक्टर के गिरफ्तारी से सम्बंधित दर्ज प्राथमिकी की कोई प्रति आयोग को नहीं दी गई, ना ही ये बताया गया कि गिरफ्तारी कब हुई और गिरफ्तार हुए इंस्पेक्टर के बदले में नई नियुक्ति कब हुई और उस नवनियुक्त ड्राइविंग टेस्ट इंस्पेक्टर ने आवेदक का टेस्ट लेने में देरी क्यों की, इन सभी संशयों का निष्पादन करने में परिवहन कार्यालय नाकाम रहे। इसलिए वर्तमान शिकायत को स्वीकार किया जाता है और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी लुधियाना को आदेशित किया जाता है कि वो आवेदक को इस आदेश के 30 दिनों के भीतर 5 हजार रूपये के मुआवजे का भुगतान करे, अन्यथा 30 दिनों के बाद इसपर 8 प्रतिशत का ब्याज भरना पड़ेगा।