Sunday, 13 September 2026
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मनीमाजरा सरकारी स्कूल में अशोक के पेड़ों की कटाई पर एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया ने मांगी जांच

चण्डीगढ़ : गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल, मनीमाजरा में कई पूर्ण विकसित अशोक के पेड़ों की कथित तौर पर बड़े पैमाने पर कटाई और छंटाई का मामला सामने आने के बाद एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया (ईएसआई) ने स्कूल शिक्षा विभाग से मामले की जांच करवाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ईएसआई के सचिव एन.के. झिंगन ने निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग, यूटी चंडीगढ़ को भेजी शिकायत में कहा है कि स्कूल परिसर में कई वर्षों से खड़े पूर्ण विकसित सजावटी अशोक के पेड़ों को उनकी ऊंचाई के लगभग आधे हिस्से तक काट दिया गया।

शिकायत के अनुसार, पेड़ों की कटाई को लेकर यह भी आरोप सामने आए हैं कि यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई, जबकि कुछ शिक्षकों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों से उचित परामर्श नहीं किया गया था। झिंगन ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से छंटाई करने के बजाय पेड़ों की ऊंचाई काफी कम कर देना उनके स्वास्थ्य, विकास, स्वरूप और पर्यावरणीय महत्व को प्रभावित कर सकता है।

सोसायटी ने स्कूल शिक्षा विभाग से पूरे मामले की फैक्ट-फाइंडिंग जांच करवाने की मांग की है। जांच में यह पता लगाने को कहा गया है कि पेड़ों को काटने की अनुमति किसने दी, किसके निर्देश पर काम हुआ और क्या सक्षम प्राधिकारी, विशेषकर वन एवं वन्यजीव विभाग से आवश्यक अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।

इसके अलावा, सोसायटी ने संबंधित वन एवं वन्यजीव अधिकारियों से मौके का निरीक्षण करवाकर पेड़ों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने तथा यह देखने की मांग की है कि क्या इन पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्स्थापित या पुनर्जीवित किया जा सकता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में किसी भी परिपक्व पेड़ को उचित मूल्यांकन और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना काटने, अत्यधिक छांटने या नुकसान पहुंचाने पर रोक के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
सोसायटी ने स्कूलों में पेड़ों की आवश्यकता होने पर वैज्ञानिक प्रूनिंग तकनीक अपनाने की सलाह देने और इस मामले में जांच के निष्कर्ष तथा की गई कार्रवाई से सोसायटी को अवगत कराने का भी आग्रह किया है।

सोसायटी ने कहा कि यदि पेड़ों की कटाई निर्धारित प्रक्रिया या वैज्ञानिक औचित्य के बिना की गई है तो इससे विद्यार्थियों और आम जनता के बीच गलत संदेश जाता है। सरकारी शिक्षण संस्थानों को पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र की रक्षा का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, न कि परिपक्व पेड़ों को अनावश्यक नुकसान पहुंचाने का। शिकायत की प्रतियां जिला शिक्षा अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ तथा मुख्य वन संरक्षक, वन एवं वन्यजीव, यूटी चंडीगढ़ को भी भेजी गई हैं।