Tuesday, 20 October 2026
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आश्चर्य: उपभोक्ता आयोग भी आँख बंद कर करते हैं फैसले

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चंडीगढ, संजय कुमार मिश्रा:
गुरुग्राम हरियाणा के जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के तहत सेवा में कमी की शिकायत को सूचना अधिकार अधिनियम 2005 बताकर ख़ारिज किया।
परिवाद संख्या 735 ऑफ़ 2022 को पहली एडमिशन हियरिंग पर ही 8 सितम्बर को ख़ारिज करते हुए आयोग ने कहा ये सूचना अधिकार का मामला है जिसपर सुनवाई का हक़ उपभोक्ता आयोग को नहीं है इसलिए ये याचिका ख़ारिज की जाती है।
याचिकाकर्ता राव धनवीर सिंह ने कहा कि उपभोक्ता आयोग जिसका गठन ही उपभोक्ता के हितों की रक्षा करने के लिए किया गया है वो आज उपभोक्ता को सुनने को तैयार नहीं है। गुरुग्राम जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के तहत सेवा में कमी की शिकायत को सूचना अधिकार का मामला बताकर ख़ारिज करना ये साबित करता है की आयोग किसी भी बहाने से उपभोक्ता की याचिका ख़ारिज करना चाहता है ना कि उसपर सुनवाई करके अपने अनुभव और योग्यता का इस्तेमाल करके एक सही फैसला ले जो कि उपभोक्ता के हित में हो।
राव धनबीर ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 76 के तहत 50 रुपए की फीस के साथ जयपुर के पुलिस उपाधीक्षक से कुछ लोक दस्तावेज की प्रमाणित प्रति चाही थी। ये दस्तावेज की कॉपी आवेदक को नही दी गई, नोटिस भेजने का भी कोई फायदा नही हुआ, तो फीस लेकर लोक दस्तावेज की प्रति नही देना, को सेवा में कमी बताते हुए गुरुग्राम जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया गया, जिसे आयोग ने विपक्षी पार्टी को बिना नोटिस जारी किए पहली सुनवाई में ही आवेदक की शिकायत को ख़ारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि दस्तावेज की सत्यापित प्रति मांगना सूचना अधिकार का मामला है जिसपर सुनवाई का अधिकार उपभोक्ता आयोग को नहीं है। याचिकाकर्ता राव धनबीर कहता रहा कि सत्यापित प्रतिलिपि के लिए मेरा आवेदन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नही बल्कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के तहत दायर की गई है जिसके तहत सेवा में कमी आई है। आवेदक ने उपभोक्ता आयोग को दिए अपने शिकायत में बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के कई फैसले का हवाला दिया, लेकिन उपभोक्ता आयोग ने उनकी एक ना सुनी और याचिका ख़ारिज कर दिया।
अब राव धनबीर का कहना है कि गुरुग्राम जिला उपभोक्ता आयोग ने जो साक्ष्य अधिनियम के तहत सेवा में कमी की शिकायत को सूचना अधिकार आवेदन बताते हुए खारिज किया इससे साफ जाहिर है कि आयोग ने अपने विवेक एवं योग्यता का इस्तेमाल नहीं किया, अगर करते तो साक्ष्य अधिनियम को वो सूचना अधिकार अधिनियम नहीं पढ़ते। अब राव धनबीर गुरुग्राम जिला उपभोक्ता आयोग के इस निर्णय के खिलाफ हरियाणा राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील करेगा।

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