Sunday, 04 October 2026
Breaking News
रामलीला मंचन एवं दशहरा महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हनुमान चालीसा के पाठ से मिली शक्ति, 174 जिंदगियों की बनी ढाल प्रगति की अंधी दौड़ और दम तोड़ती प्रकृति आईएसबी और मैक्स इंडिया फाउंडेशन ने भारत में सीनियर केयर पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए शुरू की ‘स्केल’ पहल स्वास्थ्य और लोकतंत्र के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना: जीसीसीबीए में विशेष एनएसएस शिविर का प्रभावशाली सफर जारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के छात्रों ने पंजाब यूनिवर्सिटी की "हार्मनी इन डाइवर्सिटी" प्रतियोगिता में संस्थान का नाम किया रोशन एमडीआर के विरोध में ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान वापस, वित्त मंत्री के आश्वासन के बाद व्यापारिक संगठनों ने लिया निर्णय: हरीश गर्ग पं. श्रद्धा राम फिल्लौरी की जयंती मनाई  "नशा एवं टीबी मुक्त युवा" विषय पर सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर का उद्घाटन चंडीगढ़ में 3 अक्टूबर से गूंजेगा हरिनाम, 15वीं श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन
संपादकीय लेख Trending

आज पूरी पत्रकारिता शर्मसार है!

Read in:Hindi

(MOREPIC1) मनमोहन सिंह

हमारी पत्रकारिता सीधी रसातल में जा रही है। भ्रम फैलाने और सच्चाई को छुपा कर अपने एजेंडे के अनुसार खबरें देने की लिए बदनाम पत्रकारिता ने जिस तरह फिल्म कलाकार धर्मेंद्र के देहांत की खबर चला दी उसने पत्रकारों को शर्मसार कर दिया। मुझे याद है और हमारे ज़माने में जिन लोगों ने पत्रकारिता की है वे जानते हैं कि उस समय अगर खबर में छोटी सी गलती रह जाती थी तो नौकरी चली जाती थी। हम लोग बार बार क्रॉस चेक करके खबर चलते। मगर अब तो किसी ने धर्मेंद्र जैसे कलाकार के बारे में खबर देते समय उसकी पुष्टि करना भी ज़रूरी नहीं समझा। किसी ने नहीं सोचा कि इस खबर का क्या असर होगा।

जब मैं जनसत्ता में कार्य कर रहा था तो उस समय की दो घटनाएं मुझे याद हैं। पहली तो मानीमाजरा के पास एक मंदिर को गिराए जाने की थी। हमारे एक स्ट्रिंगर ने बिना पुष्टि किए एक खबर भेज दी कि प्रशासन ने मनसा देवी   के पास एक छोटा सा मंदिर गिरा दिया है। जबकि जो गिराया गया वह मंदिर नहीं था। दूसरी खबर इंडियन एक्सप्रेस की थी जिसमें सोलन स्थित सलमान रुश्दी के घर के जल जाने से जुड़ी थी। हालांकि सोलन वाली खबर रिपोर्टर की अंग्रेज़ी भाषा को डेस्क के न समझ पाने की वजह से छप गई थी, पर इन दोनों घटनाओं में रिपोर्टर्स को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी।

मुझे नहीं पता कि धर्मेंद्र वाली इस खबर के लिए किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है या नहीं लेकिन गैरज़िम्मेदारी और जल्दबाजी की इससे बड़ी मिसाल नहीं हो सकती। खास कर सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें अक्सर देखने को मिलती हैं। हालांकि सोशल मीडिया की खबरों को ज़रूरी नहीं कि कोई पत्रकार ही चला रहा हो, पर आम लोगों था इसकी पहुंच आसानी से हो जाती है। यह कोई पत्रकारिता नहीं पर सब चल रहा है। किसी पर कोई नकेल नहीं है। अखबारों और टीवी चैनल्स की ख़िलाफ़ तो कार्रवाई हो सकती है पर सोशल मीडिया का क्या करें?

आज पत्रकारिता में एक दौड़ है। ” सबसे पहले ” के चक्कर में बहुत से अपुष्ट समाचार हम तक पहुंच जाते हैं। कुछ भी हो, किसी ने किया हो, किस भी हालात में हो, पर आज पूरी पत्रकारिता शर्मसार है।