(MOREPIC1) जीरकपुर/जगजीत सिंह
शहर की समस्याओं के बारे में बात करते हुए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ज्वाइंट एक्शन कमेटी जीरकपुर (जेएसी) के अध्यक्ष सुखदेव चौधरी ने कहा कि शहर में चल रही अवैध गतिविधियों के बारे में कोई नहीं बोल रहा है, जिसके कारण जीरकपुर शहर का भठ्ठा बैठ गया है। जबकि चुने हुए पार्षदों का कर्तव्य है कि वे अवैध गतिविधियों को लेकर आवाज उठाए।
(SUBHEAD)बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जीरकपुर शहर की आबादी पहले से कई गुना बढ़ गई है, लेकिन शहरवासियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मुझे लगता है कि जीरकपुर का कोई bवारिस ही नहीं रहा जो शहर के मुद्दों को सरकार तक पहुंचा सके। जीरकपुर शहर की हर सोसायटी, मोहल्ले, गली, कॉलोनी में सीवरेज का पानी ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों में जमा हो रहा है।
शहर की आबादी के हिसाब से सीवरेज व जलापूर्ति लाइन बिछायी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद नक्शे तो धड़ाधड़ पास कर रही है, लेकिन शहर की सीवेज, पेयजल, सड़क, सफाई, कचरा डंपिंग जैसी समस्याओं पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आज शहर में स्थिति यह हो गई है कि कथित तौर पर मिलीभगत के चलते अवैध कॉलोनियों के पानी व सीवेज कनेक्शन जोड़े जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शहरवासियों के लिए पीने के पानी की बड़ी समस्या है, शहर में जो ट्यूबवेल चल रहे हैं, उन पर क्लोरीनेशन करते एक भी नजर नहीं आता, जबकि यह महीना पानी को लेकर पानी की बीमारियों का महीना माना जाता है। शहर के चुने हुए पार्षद नगर कल्याण, सुधार एवं कार्य परिषद से करवाते हैं, लेकिन आज शहर में होने वाली अवैध गतिविधियों के बारे में कोई नहीं बोलता। 2021 में जब से कांग्रेस अध्यक्ष ने नगर परिषद जीरकपुर की कमान संभाली है तब से विकास के नाम पर एक भी ईंट नहीं लगी है।
साल 2021-22 में जीरकपुर नगर परिषद द्वारा 117 करोड़ रुपये यानी लोगों के टैक्स का पैसा बर्बाद कर दिया गया। इसके बावजूद अभी तक मामले को सुलझाने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। सुखदेव चौधरी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की है कि जीरकपुर नगर परिषद द्वारा वर्ष 2021-22 के बजट के पैसे के गबन की विजिलेंस जांच कराई जाए।