Thursday, 23 July 2026
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जीरकपुर: दो रैन बसेरे, दोनों पर शाम छह बजे के बाद लगा होता है ताला

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जीरकपुर, कृत्रिका:
कड़ाके की ठंड में हरेक व्यक्ति ठिठुर रहा है और ठंड से बचने के लिए हरेक व्यक्ति अपने ठिकाने का इंतजाम कर ही लेता है। लेकिन बे—सहारा लोग फ्लाइओवर के नीचे और सड़क किनारे ठंड में रात बिताने को मजबूर हैं। हालंकि नगर काऊंसिल जीरकपुर ने शहर में दो रैन बसेरा भी बनाए हैं। लेकिन वह शाम 6 बजे के बाद बंद होते हैं। जिनमें कोई नही जाता। जबकि यह रैन बसेरा लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। एक रैन बसेरा प्रीत कलोनी में बने कम्युनिटी सेंटर में बनाया गया है और दूसरा लोहगढ़ गांव में दुशहरा ग्राउंड की स्टेज के नीचे बने कमरे में बनाया गया है। दोनों जगह पांच पांच बेड लगाए हुए हैं। लेकिन समस्या यह है कि फेस2न्यूज की टीम ने तीन बार विजिट किया तो तीनों बार हालात अलग थे। शुक्रवार को प्रीत कलोनी के कम्युनिटी सेंटर में सरकारी गेहूं से भरा ट्रक उतारा जा रहा था, शनिवार को लॉक लगा हुआ था और सोमवार को बिस्तर इकठे कर गेंहू बांटी जा रही थी। लोहगढ़ क्षेत्र में शाम 5 बजे के बाद तीनों दिन लॉक लगा मिला। इस हालात में लोग ठंड से बचने के लिए कहा जाएंगे। फ्लाइओवर के नीचे बहुत सारे प्रवासी ठंड में रहते हैं। यदि वह उसमें जाकर रात बिताएं तो उनके वरदान साबित हो सकता है। लेकिन वह भी वहां नही जाते। इसके इलावा बहुत सारे लोग फ्लाइओवर के नीचे रात बिताते हैं।

अभी तक गिनती के बंदे ही रह चुके हैं रैन बसेरा में
रैन बसेरा में काऊंसिल द्वारा खर्च कर सुविधा दी जा रही है। लेकिन उसका इस्तेमाल ना मात्र हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से केवल तीन चार लोग ही रैन बसेरा में रुके हैं। वहीं नगर काऊंसिल के अधिकारियों का कहना है कि यदि हमारे पास कोई आएगा ही नही तो हम इसमें क्या कर सकते हैं। जबरदस्ती तो किसी को भी रैन बसेरा में नहीं डाला जा सकता। हमने इंतजाम किया है, सुविधा देने के लिए हम तैयार भी हैं। लेकिन कोई आए तो सही। वहीं कुछ लोगों का कहना यह भी है कि लोहगढ़ रैन बसेरा में बिस्तर लगा है, फर्स्ट ऐड किट भी पड़ी है लेकिन बाथरूम न होने के कारण बहुत समस्या आती है। हांलांकि वहां सुविधा सेंटर का बाथरूम है लेकिन वह पांच बजे के बाद बंद हो जाता है। वहीं फ्लाइओवर के नीचे बैठे लोगों ने बताया कि दोनों सुविधा सेंटर दूर हैं यदि आसपास हो तो हम रात बिता भी सकते हैं।

हमने तीन रैन बसेरा बनाए हुए हैं, उनमें बिस्तर व मेडिकल सुविधा भी मौजूद है। लेकिन समस्या यह है कि वहां कोई आ ही नही रहा। फ्लाइओवर के नीचे रहने वाले लोगों को हमने बोला था कि वे वहां रूक जाएं, लेकिन वे वहां जाने के लिए राजी नहीं होते। क्योंकि यह लोग आसपास ही काम करते हैं।
— रवनीत सिंह, कार्यकारी अधिकारी

हमने आज फ्लाइओवर के नीचे बैठे प्रवासी लोगों को रैन बसेरा में लेकर जाने की कोशिश की थी, लेकिन वह फिर से वापिस आ जाते हैं। ये लोग रैन बसेरा में रुकना ही नही चाहते। हमने काफी कोशिश की लेकिन वह मान ही नही रहे।
— राम गोपाल, सेनेटरी इंस्पेक्टर