Tuesday, 14 April 2026
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बिका हुआ माल वापस नहीं होगा, कानूनन गलत, उपभोक्ता आयोग ने 7000 रुपए का जुर्माना लगाया

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अजमेर/चंडीगढ़, संजय मिश्रा:
बिका हुआ माल किसी भी सूरत में वापस नहीं होगा और ना ही बदला जाएगा, अपने बिल में ये प्रिंट कराना या दुकान में इस तरह का नोटिस बोर्ड प्रदर्शित करना कानूनन गलत, अजमेर जिला उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार पर 7000 रुपए का जुर्माना लगाया।
9 अक्टूबर 2023 को शिकायत संख्या 154 ऑफ़ 2019 को निस्तारित करते हुए आयोग ने कहा, बिका हुआ माल किसी भी सूरत में वापस नहीं होगा और ना ही बदला जाएगा, अपने बिल में ये प्रिंट कराना या दुकान में इस तरह का नोटिस बोर्ड प्रदर्शित करना कानूनन गलत है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 14 के खिलाफ है। यही नहीं दुकानदार के उपरोक्त कृत्य राजस्थान सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा जारी पत्रांक 89 दिनांक 31 जुलाई 2017 का भी स्पष्ट उल्लंघन है जिसमें साफ़ साफ़ बताया गया है कि बिका हुआ माल वापस नहीं होगा और ना ही बदला जाएगा, अपने बिल में ये प्रिंट कराना या दुकान में इस तरह का नोटिस बोर्ड प्रदर्शित करना कानूनन गलत है।
मामले अनुसार अजमेर निवासी एवं अधिवक्ता तरुण अग्रवाल ने 7 जुलाई 2018 को पेस टेल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड अजमेर से 450 रूपये का एक मोबाइल चार्जर ख़रीदा जिसका बिल नंबर 118190276 था जिसके नीचे वर्णित टर्म में पहले नंबर पर लिखा हुआ था – बिका हुआ माल ना तो वापस होगा और ना ही बदला जाएगा। इसपर ग्राहक ने अपनी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा लिखना कानूनन गलत है और ये उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के धारा 14 के खिलाफ है, कृपया इसे अपने बिल से निकलवा दें। दुकानदार ने ग्राहक के इन बातों को अनसुना कर दिया।
तरुण अग्रवाल ने अजमेर जिला आयोग में इसकी शिकायत देते हुए प्रार्थना की कि अप्रार्थी का उपरोक्त कृत्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 14 के विरुद्ध है एवं राजस्थान सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग के पत्र दिनांक 31 जुलाई 2017 के भी विरुद्ध है और प्रार्थना की गई कि दुकानदार को उपरोक्त कृत्य से रोका जाय एवं जुर्माना भी लगाया जाए।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एवं प्रेषित दस्तावेज अवलोकन के बाद पाया कि बिल पर अंकित उपरोक्त टर्म उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम एवं राजस्थान सरकार के उपरोक्त पत्र के विरुद्ध है, इसलिए परिवाद को स्वीकार करते हुए दुकानदार के ऊपर 5000 रुपया का जुर्माना लगाया एवं 2000 रुपया मुकदमा खर्च के लिए यानि कुल 7000 रुपया का रकम शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया।