Monday, 27 July 2026
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मरीज से पूरी फीस लेकर भी सिविल अस्पताल में एक्स . रे की हार्ड कॉपी नहीं मिलती

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डेराबस्सी, कृतिका:
सेहत सुविधाओं को बेहतर बनाने क सरकारी दावों की पोल डेराबस्सी सब डिवीजनल अस्पताल में सरेआम बेनकाब हो रही है। यहां मरीजों से पूरी फीस लेकर भी सिविल अस्पताल में एक्स- रे की हार्ड कॉपी नहीं दी जा रही। करीब दो महीने से सिर्फ सॉफ्ट कॉपी से काम चलाया जा रहा है। कंप्यूटर स्क्रीन से एक्सरे की फोटो सेलफोन पर खींचकर ही ईलाज किया जा रहा है। दरअसल ए अस्पताल में एक्सरे के प्रिंट वाली फिल्म स्टॉक में खत्म है जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन भी खराब पड़ी है। यह आलम तब है जब खुद सेहतमंत्री जोड़माजरा अस्पताल का एक महीने में दो बार दौरा कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक डेराबस्सी के सिविल अस्पताल में दो महीने से एक्स- रे फिल्में खत्म हो गई हैं। रेडियोग्राफर द्वारा एक्स रे किए जाने के बाद रोगी को मोबाइल फोन में कंप्यूटर स्क्रीन पर एक्सरे का फोटो उसके सेलफोन पर खींचकर दे दिया जाता है। जिनके पास स्मार्ट फोन या फोन नहीं होते, उनके फोटो रेडियोलॉजिस्ट खुद अपने सेलफोन से खींचकर फोटो डॉक्टर्स तक भेज देता है।
फोटो खींच डॉक्टर को भेजी जाती है रिपोर्ट:
इन सॉफ्ट तस्वीरों को सेलफोन पर स्टडी करके ही मरीज का ईलाज शुरू किया जाता है, जबकि एक्सरे की 120 रुपए फीस पूरी ली जा रही है। एक बाई एक फीट फिल्म साइज वाले एक्सरे की सेलफोन स्क्रीन पर स्टीक स्टडी कारगर नहीं मानी जा
सकती। छाती और अन्य अंगों में खामियां भी साफ नजर नहीं आती। ऐसे में मरीज का सही ईलाज न होने का खतरा अलग से बढ़ जाता है। जिन मरीजों के पास स्मार्ट सेलफोन नहीं होता, वे तो अपनी रिपोर्ट किसी और डॉक्टर को दिखाने लायक भी नहीं रहते।  (SUBHEAD)
सिविल अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग का दौरा करने पर सामने आया कि एक्सरे फिल्म करीब 2 महीने से आउट ऑफ स्टॉक है। नाम न बताने की शर्त पर मरीजों ने बताया कि उनसे एक्सरे का 120 रुपए शुल्क भी पूरा लिया जाता है, लेकिन एक्स- रे का प्रिंट; हार्ड कॉपी, देने की बजाय फोन पर फोटो खींची जाती है। इसी फोटो की कॉपी डॉक्टर को भी मरीज के नाम से फॉरवर्ड की जाती है ताकि नाम बताकर डॉक्टर से एक्सरे रिपोर्ट दिखाकर ईलाज कराया जा सके।

5 दिन पहले डेराबस्सी शिफ्ट हुआ हूं। कमी को पूरा करने के लिए अफसरों से तालमेल करेंगे।
– डॉ धमिंदर सिंह डेराबस्सी एसएमओ

फिल्म प्रिंट आउट ऑफ स्टॉक क्यों है, इस बारे एसएमओ से पूछा जाएगा।
– सिविल सर्जन आदर्श पाल कौर