Sunday, 20 September 2026
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सुर की जादूगरी व तबले पर ताल की लयकारी पर झूमे श्रौता

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पटियाला, फेस2न्यूज:
पटियाला के नार्थ जोन कल्चर सेंटर के कालीदासा आडिटोरियम में चल रहे चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह बड़ी ही सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। जहां शास्त्रीय संगीत की महफिलों में दर्शकों की कमी निराश करती है वहीं इस समारोह में दर्शकों की उपस्थिति उत्साह बढ़ाने वाली है। प्रस्तुति के शानदार स्तर और सुधि दर्शकों के उत्साह ने ना केवल कलाकारों के हौंसले बढ़ाए बल्कि पटियाला की विरासत को आगे बढ़ाने में प्रयासरत नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर के जिम्मेदारों भी बहुत संतुष्ट नज़र आए।
अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मोरमुकट केडिया व पंडित मनोज केडिया ने अपनी जुगलबंदी की प्रस्तुति दी। बड़े भाई पंडित मोरमुकुट केडिया और छोटे भाई पंडित मनोज केडिया ने समारोह में सितार और सरोद वादन में जैसे ही राग किरवानी ओर राग झिंझोटी की पेशकश दी तो पूरे आटोडोरियम में बैठे श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे। इसके बाद दोनों भाईयों ने राग माज-खमाज, यमन, चन्द्रनन्दन, पुरिया कल्याण, देश, मिश्र पीलू की पेशकश दी।
इन दोनों कलाकारों ने बढ़ती ठंड में भी अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को सीटों पर जमकर बैठने को मजूबर कर दिया। इस दौरान पंडित मोरमुकुट ने बताया कि उनकी जुगलबंदी को पचास वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। उन्होंने बताया कि सात वर्ष की आयु में दोनों भाइयों ने पहली प्रस्तुति दी थी। इस दौरान मोरमुकुट केडिया ने बताया कि राग किरवानी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में एक संगीत पैमाना है। यह एक भारतीय राग है जो विशेष रूप से वाद्य संगीत के लिए उपयुक्त है। यह पैमाना पश्चिमी संगीत में हार्मोनिक माइनर के समान है। किरवानी में पीलू की छटा है। ऐसा कहा जाता है कि यह राग कर्नाटक संगीत के राग कीरावनी से लिया गया है। पंडित मनोज केडिया ने बताया कि राग झिंझोटी चंचल प्रकृति का राग है इसीलिए यह राग वाद्य यन्त्रों के लिये बहुत उपयुक्त है। इसमे श्रृंगार रस की अनुभूति होती है अतः इसमें भजन, ठुमरी, पद इत्यादि गाये जाते हैं। इस राग का विस्तार मंद्र और मध्य सप्तक में विशेष रूप से होता है। बता दें कि बड़े भाई पंडित मोरमुकुट केडिया और पंडित मनोज केडिया सरोद-सितार की जुगलबंदी में खासी महारत हासिल की है। केडिया बंधु देश के एकमात्र ऐसे कलाकार हैं जो सरोद-सितार की जुगलबंदी में है। भारतरत्न पंडित रविशंकर और पद्मविभूषण उस्ताद अली अकबर खान के बाद केडिया बंधु संगीत की इस विधा को आगे ले जा रहे हैं।
-अमान खान ने तराने ताना दारे दीम… से श्रोताओं की तालियां बटोरी
चार दिवसीय संगीत समारोह के तीसरे दिन आगरा और पटियाला घराने के शास्त्रीय गायक मोहम्मद अमान ने गायन की शुरुआत राग गोरख कल्याण पर आधारित विलंबित ख्याल धन-धन भाग्य… से किया। गायकी की परिपक्वता एवं सुमधुर लयकारी ने श्रोताओं को अभिभूत किया। सुरों पर गहरी पकड़ ने अमान की गायकी को अद्वितीय बनाया। उन्होंने मध्य लय तीन ताल में निबद्ध रचना ऐरी मोरी आली पिया घर आए… ने समां बांधा, वहीं द्रुत लय में तराने ताना दारे दीम… से श्रोताओं की तालियां बटोरी। अंत में राग खमाज में एक ठुमरी तोरे मद भरे नैन रसीले गाई तो ऐसा लगा मानो की स्वरों की खुशबू चारों दिशाओं में बिखर गई है। बता दें कि अमान ने संगीत की शिक्षा अपने दादागुरू उस्ताद अमीर मोहम्मद खान से प्राप्त की।