Monday, 15 June 2026
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सूचना अधिकार आवेदन को आँख बंद कर तीसरा पक्ष बताना एवं ख़ारिज करना गलत: सीआईसी

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संजय कुमार मिश्रा:
सूचना अधिकार आवेदन पर अपना दिमाग लगाए बिना तीसरे पक्ष का बताते हुए आँखे बंद करके ख़ारिज करने को केंद्रीय सूचना आयोग ने गलत परम्परा बताया है। केंद्रीय सूचना आयोग में द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश आरटीआई आवेदन सख्ती से पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना के अनुसार 21 दिनों की अवधि के भीतर सूचनाएं देने का आदेश दिया।
केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली ने निशा गुप्ता पत्नी कमलेश गुप्ता ग्राम वेदपुर तहसील ज्ञानपुर ज़िला भदोही के द्वारा दर्ज वाद संख्या – CIC/ NIACL/A/2022/105298-UM सुनवाई करते हुए कानपुर दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी नोएडा सीपीआईओ आरटीआई सेल क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर को निर्देश आरटीआई आवेदन पर सख्ती से पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना के अनुसार 21 दिनों के अंदर दुर्घटना बीमा की पूरी जानकारी के साथ लाल चंद गुप्ता की पूरी जानकारी उपलब्ध करने का आदेश दिया है!
भदोही उत्तर प्रदेश के निवासी निशा गुप्ता के पति को एक क़त्ल के केस में मनमाने तौर पर 13 अन्य लोगों के साथ आरोपी बनाया गया, जबकि मृतक के घरवाले इस नार्मल मौत का मुआवजा बीमा कंपनी से ले चुके है। निशा गुप्ता ने सूचना अधिकार कानून के तहत बीमा कंपनी से मृतक के मौत एवं क्लेम से सम्बंधित कुछ दस्तावेज मांगे ताकि उसे कोर्ट में पेश कर अपनी बेगुनाही साबित की जा सके, लेकिन बीमा कंपनी के लोक सूचना अफसर ने जानकारी नहीं दी और इस आवेदन को तीसरा पक्ष से सम्बंधित बताकर कानून की धारा 8 के तहत निरस्त कर दिया, प्रथम अपील में भी कुछ नहीं हुआ फिर मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंचा।
केंद्रीय सूचना आयोग के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने अपने फैसला में कहा है कि मामले के तत्वों और अपीलकर्ता द्वारा किये गए निवेदन है पर ध्यान में रखते हुए रिकार्ड पर दस्तावेजों के अवलोकन बाद आयोग ने आवेदनकर्ता द्वारा जो सूचना मांगी गई है, स्वर्गीय लालचंद गुप्ता वेदपुर से संबंधित है लेकिन इंश्योरेंस कंपनी के सीपीआईओ और प्रथम अपीलीय अधिकारी इसे आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 8(1)J की गलत व्याख्या कर इसे तृतीय पक्ष व्यक्तिगत सूचना थर्ड पार्टी कहकर जान बूझकर सूचना नहीं देने की नियत से रोका था जो आरटीआई के तहत गलत है। केंद्रीय सूचना आयुक्त ने 15 जून 2023 आदेश की प्राप्ति तिथि से 21 दिनों के अंदर संपूर्ण दस्तावेज सूचना देने के लिए आदेश जारी किया।
आवेदक निशा गुप्ता और उनके पति कमलेश गुप्ता ने कहा कि दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने उसे गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जीत सच्चाई की हुई। अब एश्योरेन्स कम्पनी को सभी सूचना देनी पड़ेगी जिससे अदालत में करीब 13 लोग बेगुनाह साबित होगे और वास्तविक अपराधी कानून के गिरफ्त में आएंगे। श्रीमती गुप्ता ने लोगों से अपील किया की वो सूचना का अधिकार कानून में विश्वास रखें और जो भ्रष्ट अधिकारी सूचना कानून को मजाक बनाते है उनकी शिकायत आयोग को करें या सूचना नहीं देने पर F.I.R भी करा सकते है।