Sunday, 18 October 2026
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गुरु-भक्ति और ध्यान के रंग में रंगी संगत, 50 श्रद्धालुओं ने धारण किया पीताम्बर

जीरकपुर: विश्वास फाउंडेशन, पंचकूला द्वारा गुरुदेव श्री स्वामी विश्वास जी के पीताम्बर दिवस के उपलक्ष्य में होटल पार्क प्लाजा, जीरकपुर में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक समागम का समापन ध्यान, सत्संग और भावपूर्ण भजनों के साथ हुआ। समागम के तीसरे दिन सुबह की ध्यान बैठक में गुरुदेव श्री ने श्रद्धालुओं को अंतर्मन से जुड़ने, स्वयं को पहचानने और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए 50 श्रद्धालुओं ने पीताम्बर भी धारण किया।

गुरुदेव श्री स्वामी विश्वास जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि जीवन की व्यस्तताओं के बीच मनुष्य बाहरी संसार में इतना उलझ जाता है कि स्वयं के लिए समय निकालना भूल जाता है। ध्यान उसे अपने भीतर झांकने और अंतर्मन को समझने का अवसर देता है। नियमित ध्यान का अभ्यास मन की चंचलता को शांत करने तथा जीवन में धैर्य, एकाग्रता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

उन्होंने कहा कि ध्यान का उद्देश्य केवल मानसिक शांति प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मबोध की ओर बढ़ना और परमात्मा के प्रति विश्वास एवं समर्पण को प्रगाढ़ करना भी है। श्रद्धा और एकाग्रता से किया गया ध्यान व्यक्ति के विचारों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। प्रेम, करुणा, विनम्रता और सद्भाव जैसे गुणों को जीवन में अपनाकर ही आध्यात्मिक शिक्षाओं को सार्थक बनाया जा सकता है।

सत्संग के उपरांत गुरुदेव श्री ने भावपूर्ण भजन ‘बातों-बातों में बीते न उमरिया, तुझे होश न आया, यूं ही वक्त गंवाया, किया कभी न भजन ओ मेरे मन’ का गायन किया। भजन के माध्यम से उन्होंने समय के महत्व और प्रभु-स्मरण का संदेश दिया। मधुर प्रस्तुति सुनकर उपस्थित संगत भावविभोर हो उठी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

विश्वास फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी नीलिमा विश्वास जी ने बताया कि गुरुदेव श्री की शिक्षाएं श्रद्धालुओं को सदाचार, सेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि सत्संग से प्राप्त प्रेरणा को अपने आचरण में उतारना और जरूरतमंदों की सेवा करना आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरु के मार्गदर्शन और नियमित ध्यान के अभ्यास से जीवन को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।

समागम में श्रद्धालुओं ने ध्यान, सत्संग और भजनों में भाग लेकर गुरुदेव श्री के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। बैठक के समापन पर गुरुदेव श्री ने ‘ॐ गुरुवे नमः’ महामंत्र का गायन किया। तीन दिवसीय समागम ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, गुरु-भक्ति और ध्यान से जोड़ते हुए प्रेम, शांति, सेवा एवं सद्भाव का संदेश दिया।

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