Sunday, 13 September 2026
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हमारे समय तुम कहां थे प्रभु?

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

मन करता है चरण चूम लूं। मुख्यमंत्री हो तो ऐसा। कावड़ यात्रा शुरू तो स्कूल और कॉलेज बंद। हमारे समय में तुम कहां थे प्रभु। नहीं तो यह सुविधा हमें भी प्राप्त हो जाती। हमें तो ठिठुरती सर्दी, भयंकर बरसात या तपती गर्मी में रोज़ स्कूल जाना पड़ता था। होली, दिवाली, ईद , 15 अगस्त, 26 जनवरी को छोड़ कर कोई छुट्टी नहीं मिलती थी ऊपर से अध्यापक के हाथ में डंडा। जिस तरह से डंडा पुलिस अफसरों की वर्दी का हिस्सा है उसी तरह से उस ज़माने में अध्यापक और डंडे का चोली दामन का साथ था।

प्रभु अगर आप उस समय होते तो उस मार से बच जाते, कावड़ उठते नाचते गाते थोड़ी मस्ती और तोड़ फोड़ कर लेते, मज़ा आ जाता। पर तब तक आप “अवतरित” नहीं हुए थे। आज के बच्चे बहुत किस्मत वाले हैं जिनके माता पिता ने आपकी प्रतिभा को देख कर आपको वोट किया और मुख्यमंत्री बनाया, और उसी पुण्य काम के बदले आपने बच्चों को छुट्टियां देदी। मजे करो। पढ़ाई का क्या है ? करो न करो, प्रश्नपत्र तो बाज़ार में उपलब्ध हो ही जाने हैं।

न्हीं प्रश्नों के उत्तरों की पर्चियां बना कर परीक्षा केंद्र चले जाना क्योंकि उत्तर तो आप याद नहीं कर पाओगे। उत्तर तो तभी याद होते हैं जब कभी क्लास में गए हो किताब खोली हो, कुछ पढ़ा हो। इसीलिए आपको पर्चियों की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाएं। पर बी ए तक इतना तो ज़रूर पढ़ लेना कि सांसद या विधायक की शपथ लेते समय आप शपथपत्र को पढ़ सकें और शब्दों का उच्चारण सही कर सकें। नहीं तो आप की तो पता नहीं पर जिन्हों ने आपको चुनकर संसद या विधानसभा में भेजना है उनकी बड़ी बेइज्ज़ती होगी।