Wednesday, 28 October 2026
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रोहित कुमार मौत मामले में चण्डीगढ़ पुलिस के तीन पुलिसकर्मियों को अदालत का नोटिस, 18 सितंबर को सुनवाई

फेस2न्यूज/चण्डीगढ़

वर्ष 2018 में दीपावली के दिन हल्लोमाजरा में 27 वर्षीय इलेक्ट्रिकल इंजीनियर रोहित कुमार की मौत के मामले में चंडीगढ़ की अदालत ने तत्कालीन सेक्टर-31 थाना में तैनात तीन पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. अंबिका शर्मा की अदालत ने मामले में संज्ञान लेने से पहले आरोपितों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का निर्णय लिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।

यह आपराधिक शिकायत मृतक रोहित कुमार के चाचा सिकंदर कुमार ने वर्ष 2019 में दायर की थी। शिकायत में तत्कालीन सेक्टर-31 थाना में तैनात पुलिसकर्मी मनजीत और अजय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत हत्या का आरोप लगाया गया है। वहीं, तत्कालीन थाना प्रभारी गुरजीत कौर के खिलाफ धारा 201 आईपीसी के तहत साक्ष्य मिटाने और कथित तौर पर आरोपित पुलिसकर्मियों को बचाने का आरोप लगाया गया है।

छत से गिरने से हुई थी रोहित की मौत

शिकायत के अनुसार, 7 नवंबर 2018 को दीपावली के दिन रोहित कुमार अपने रिश्तेदारों के साथ हल्लोमाजरा स्थित मकान नंबर 256 की छत पर बैठा था। इसी दौरान सेक्टर-31 थाने के दो पुलिसकर्मी वहां पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने वहां मौजूद लोगों पर जुआ खेलने का आरोप लगाते हुए पूछताछ की और रोहित से कथित तौर पर पैसे निकालने का प्रयास किया। शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर रोहित के साथ मारपीट की गई और उसे छत से नीचे धक्का दे दिया गया। गंभीर रूप से घायल रोहित को जीएमसीएच-32 ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

पुलिस पर मामले को दुर्घटना का रूप देने का आरोप

शिकायतकर्ता ने अदालत में आरोप लगाया कि घटना के बाद परिजनों ने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने और आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में तत्कालीन थाना प्रभारी गुरजीत कौर पर कथित रूप से घटना को दुर्घटना का रूप देने तथा महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सही तरीके से सामने न लाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता की ओर से मामले में प्रत्यक्षदर्शियों के अलावा डीडीआर, पुलिस कंट्रोल रूम में 100 नंबर पर की गई कॉल का रिकॉर्ड, मेडिकल एवं पोस्टमार्टम रिकॉर्ड, सीएफएसएल से संबंधित दस्तावेज और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की मांग की गई है।

संज्ञान से पहले आरोपितों को सुनवाई का अधिकार

10 अगस्त 2026 के आदेश में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय परविंदर सिंह बनाम प्रवर्तन निदेशालय, 2026 आईएनएससी 519 तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्णय सिकंदर सिंह बनाम प्रवर्तन निदेशालय, सीआरएम-एम-29954-2025 में निर्धारित कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख किया।

अदालत ने बीएनएसएस की धारा 223 के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने प्री-कॉग्निजेंस चरण में तीनों आरोपितों मनजीत, अजय और गुरजीत कौर, जो 7 नवंबर 2018 को सेक्टर-31, चंडीगढ़ में तैनात थे, को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
अदालत ने तीनों आरोपितों को 18 सितंबर 2026 को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। अदालत ने अहलमद को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।

मृतक के परिवार की ओर से अधिवक्ता सतिन्दर सिंह ने अदालत के आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि बीएनएसएस की धारा 223 के प्रावधान के तहत अदालत ने संज्ञान लेने से पहले आरोपित पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया है।

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