Sunday, 03 May 2026
Breaking News
पंचकुला मेयर चुनाव के बीच हुड्डा का चन्द्रमोहन और सुधा भारद्वाज को करारा झटका, पर्ल चौधरी को सौंपी हरियाणा महिला कांग्रेस अध्यक्ष की कमान प्रथम माता मनसा देवी ट्रॉफी नार्थ जोन अंडर-14 संयुक्त लड़के एवं लड़कियों का ट्वेंटी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट चंडीगढ़ और पंचकूला में 18 मई से रानी लक्ष्मीबाई हॉल में “शाम-ए-बहार” का रंगारंग आयोजन, सदाबहार गीतों पर झूमे दर्शक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत केंद्र के पारित काले कानून की वापसी को लेकर 20 लाख पैरामिलिट्री परिवार उतरेंगे सड़कों पर विश्व में युद्ध का वातावरण, भारत को भी सामरिक दृष्टि से घेरने का षड्यंत्र चल रहा  : सांसद सुभाष बराला गौड़िया मठ सेक्टर-20 में नरसिंह चतुर्दशी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया रजनीश कालिया श्री शिव मन्दिर सभा, सैक्टर 23-डी के अध्यक्ष बने पंजाबी विकिमीडियंस यूजर ग्रुप ने उर्दू विकीसोर्स शुरू किया : रेख्ता फाउंडेशन और ब्रिटिश लाइब्रेरी के साथ साझेदारी की निराशा के समंदर में तलाशो आस के मोती दिलों में इक नई आशा जगाना भी ज़रूरी है राजपाल सिंह व सुश्री सरगुन अरोड़ा, चंडीगढ़ 8वें सुदामा कप 2026 के 55 प्लसमिक्स्ड डबल्स फाइनल में।
पंजाब Trending

आजादी का अमृत महोत्सव मना चुके देश की नई पीढ़ी को मैकाले की जूठन काले गाउनों में डिग्री क्यों?

Read in:Hindi

अमृतसर, फेस2न्यूज:
श्री गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में फिर वही डायर मैकाले के जूठे और गुलामी का प्रतीक काले गाउन छाए रहे।
पूर्व केबिनेट मंत्री रही लक्ष्मीकांता चावला ने सवाल उठाते हुए कहा कि अंग्रेजों के समय के बनाए बेतुके टोप सिर पर पहनकर वरिष्ठ शिक्षाविद् और अधिकारी कैसे सिर उठाकर चलते हैं, यह आश्चर्य और दुख की बात है। अंग्रेजी का प्रभुत्व भी वहां छाया रहा। बहुत से वक्ता केवल अंग्रेजी में बोले और पंजाबियत के नाम पर लोगों को लड़ाने वाले वहां पूरे खामोश रहे। यह ठीक है कि उपकुलपति का भाषण पंजाबी में था, लेकिन जो दूसरे प्रांतों से आए मेहमान थे वे न तो अपने प्रांत की भाषा में बोले, न हिंदी में।
हिंदी का तो पूरा त्याग गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी करती ही है। यह ठीक है कि राज्यपाल महोदय ने हिंदी का थोड़ा साथ दिया।
भारतीय भाषाओं के नाम पर देश को लड़ाने वाले अंग्रेजी को मां के दूध की तरह पचा जाते हैं और समारोह में उपस्थित कोई भी बड़े से बड़ा बुद्धिजीवी यह सवाल नहीं करता कि स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना चुका देश अभी भी मैकाले और डायर की जूठन का गुलाम क्यों?
देश के बहुत विश्वविद्यालय काला गाउन परंपरा छोड़ चुके हैं, पर पंजाब और हरियाणा अभी तक इसे छोड़ने को आखिर क्यों तैयार नहीं।