Thursday, 23 April 2026
Breaking News
'भारत-विभाजन : एक हकीकत, एक अफसाना था, पुस्तक का विमोचन अक्षय तृतीया पर श्री राम वेद गुरुकुलम में शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी में अक्षय तृतीया पर्व श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने का विरोध   वर्तमान में "अहिंसा परमो धर्म:" की भावना पहले से अधिक प्रासंगिक : श्री नायब सिंह सैनी गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन का 16वां वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न गुरप्रीत कौर बनीं वीजी मिसेज इंडिया ग्लोबल आइकन फिनेस्स-2026 की उपविजेता महिला कांग्रेस नेत्री ममता डोगरा ने प्रधानमंत्री पर तीखा निशाना साधा, कहा पहले से पारित महिला कांग्रेस आरक्षण बिल लागू क्यों नहीं किया हर संकट में मददगार बन जाती हैं दुआएं क्योंकि दुआएं कमाना ही जीवन की सच्ची कमाई है : बीके उषा दीदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने से अधिक समावेशी और समतावादी समाज का निर्माण होगा : मोनिका भारद्वाज
राष्ट्रीय Trending

भारत-पाक बीच हुए 1971 के युद्ध की दास्तान, कंपकंपाती सर्दी में 3 दिसंबर 1971 को फाजिल्का शहर हो गया था खाली

Read in:Hindi

फेस2न्यूज/फाजिल्का

भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के महायुद्ध की दास्तान सुनाई जाती है तो अब भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। 3 दिसंबर 1971 की सायं पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया था। तोपों और टैंकों के आग बरसाते गोलों से फाजिल्का क्षेत्र का आकाश लाल हो चुका था।

सीमावर्ती ग्रामीण अपने अपने खेतों से घर की तरफ और नगर में दुकानदार दुकानें बंद कर अपने घरों में लौट आए। लड़ाई तेज होते देख बिना कुछ खाए पिए ही अपने परिवारों को सुरक्षित स्थानों की तरफ ले जाने के लिए दौड़ पड़े। उस समय दोपहिया वाहन और कारों के कम होने के कारण लोग बच्चों को कंधों पर बैठा पैदल निकले तो कई साइकिलों और अन्य वाहनों द्वारा अबोहर मलोट सड़क की तरफ चले गए।

(SUBHEAD)   कंपकंपाती सर्दी के चलते रास्ते की घटना बताते हुए लीलाधर शर्मा ने बताया कि एक बुजुर्ग कोटूराम अपनी भैंस पर चढ़कर सुरक्षित स्थान की तरफ जा रहा था। उन्होंने बताया कि मलोट अबोहर और बठिंडा की सामाजिक संस्थाओं ने युद्धग्रस्त क्षेत्र के लोगों के रहने खाने-पीने का उचित प्रबंध भी किया था।

युद्ध में फाजिल्का की गौशाला में गोला गिरने से कई गऊएं और ग्वाले भी भेंट चढ़ गए। वही बसों में चढ़ने से कई लोग घायल भी हुए। उसी युद्ध में फाजिल्का 25 दिनों तक खाली रहा। वहीं कई सीमावर्ती गांव पाकिस्तान ने अपने कब्जे में ले वहां के कई ग्रामीणों को गिरफ्तार कर पाकिस्तान की लखपत जेल में 10 माह तक रखा।