Monday, 07 September 2026
Breaking News
पौड़ी गढ़वाल एकता मंच के महिला प्रकोष्ठ ने किया रामायण पाठ का आयोजन शिक्षा में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए इंदु बब्बर राज्य पुरस्कार से सम्मानित आचार्य देवों भवा 2026 में चंडीगढ़ से पहुंचे डॉ. अमनदीप सिंह को ज्योतिष एवं अंकशास्त्र के क्षेत्र में विशेष सम्मान 1965 के भारत-पाक युद्ध की दास्तां, जब फाजिल्का क्षेत्र खाली हो गया था संत विनोबा भावे सम्मान-2026 समारोह में साहित्य, पत्रकारिता एवं समाजसेवा की विभूतियाँ सम्मानित उत्तराखंड भ्रातृ संगठन का भव्य लाइट एंड साउंड शो और श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का सफल मंचन भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान के अध्यक्ष कुरेशी का अपहरण और यातनाएं पुलिस ने किया एक प्रदर्शनकारी के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार: सुखबीर सिंह बादल इंटर स्कूल स्टेट स्तरीय टूर्नामेंट में सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 8 की शानदार उपलब्धि ‘एकम न्याय संवाद’ आयोजित: सांसदों और न्यायिक क्षेत्र के दिग्गजों ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग की आवश्यकता पर किया मंथन
राष्ट्रीय Trending

पीईसी ने उत्तराखंड के पत्रकार की रहस्यमय मौत की निष्पक्ष जांच की माँग की

Read in:Hindi

(MOREPIC1)फेस2न्यूज/जेनेवा:

वैश्विक मीडिया सुरक्षा एवं अधिकार संगठन प्रेस एम्बलम कैंपेन (PEC) ने उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की रहस्यमयी मौत पर गहरी चिंता जताई है और इसके पीछे की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जाँच की माँग की है। 36 वर्षीय राजीव का शव 28 सितंबर, रविवार को भागीरथी नदी पर बने जोशियारा जलविद्युत बैराज से बरामद हुआ था। वह 18 सितंबर से लापता थे।

नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के पूर्व छात्र राजीव “दिल्ली उत्तराखंड लाइव” नामक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म चलाते थे, जो खास तौर पर स्थानीय मुद्दों को उजागर करता था।

पीईसी के अध्यक्ष ब्लेज़ लेम्पेन ने कहा— “हम चाहते हैं कि राजीव प्रताप सिंह की मौत की परिस्थितियों की गंभीर और निष्पक्ष जाँच हो। यदि इसमें किसी की संलिप्तता पाई जाती है तो उन्हें क़ानून के तहत दंडित किया जाए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से पहल करनी चाहिए, क्योंकि कहा जा रहा है कि पत्रकार को उनकी रिपोर्टिंग के कारण कई बार धमकियाँ मिली थीं।”

पीईसी के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया प्रतिनिधि नव ठाकुरिया ने बताया कि इस वर्ष अब तक दुनिया भर में 136 पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं। कुछ महीने पहले नेपाल की राजधानी काठमांडू में राजशाही समर्थक आंदोलन के दौरान पत्रकार सुरेश रजक की हत्या कर दी गई थी।

भारत में भी 1 जनवरी 2025 से अब तक पत्रकार मुकेश चंद्राकर, राघवेंद्र वाजपेयी, सहदेव डे, धर्मेंद्र सिंह चौहान और चिंताकयालु नरेश कुमार की हत्या हो चुकी है। वहीं, बांग्लादेश में कम से कम चार पत्रकार—मोहम्मद असदुज्जमां तुहिन, बिभुरंजन सरकार, अनवर हुसैन और खंडाकर शाह आलम—की हत्या कर दी गई।